नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिवाली के अवसर पर मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित कर रहे हैं. उन्होंने अपने इस कार्यक्रम की शुरुआत में सबसे पहले दिवाली की शुभकामनाएं दीं. पीएम मोदी ने कहा कि रोशनी के इस त्योहार पर सकारात्मक को अपनाएं. साथ ही उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कई देश दिवाली मनाते हैं.

1.अन्य राज्य के लोगों के साथ मिलकर बनाएं त्यौहार
पीएम ने कहा, “दुनिया में festival tourism का अपना ही आकर्षण है. हमारा भारत, जो country of festivals है, उसमें festival tourism की भी अपार संभावनाएँ है. हमारा प्रयास होना चाहिए कि होली हो, दिवाली  हो, ओणम हो, पोंगल हो, बिहु हो, इन जैसे त्योहारों को प्यार करें और त्योहारों की खुशियों में, अन्य राज्यों, अन्य देशों के लोगों को भी शामिल करें.”उन्होंने आगे कहा, “पिछली ‘मन की बात’ में हमने तय किया था कि इस दीपावली पर कुछ अलग करेंगे. मैंने कहा था – आइये, हम सभी इस दीपावली पर भारत की नारी शक्ति और उनकी उपलब्धियों को celebrate करें, यानी भारत की लक्ष्मी का सम्मान. और देखते ही देखते, इसके तुरंत बाद, social media पर अनगिनत inspirational stories का अंबार लग गया.”

2. गुरू नानकदेव को किया याद
पीएम ने आगे कहा, “12 नवंबर, 2019 – यह वो दिन है, जिस दिन दुनिया भर में, श्री गुरुनानक देव जी का 550 वाँ प्रकाश उत्सव मनाया जाएगा. गुरु नानक देव जी का प्रभाव भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व मे है. दुनिया के कई देशों में हमारे सिख भाई-बहन बसे हुए हैं जो गुरु नानक देव जी के आदर्शों के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं.”

पीएम ने कहा, “श्री गुरु नानक देव जी ने अपना सन्देश, दुनिया में दूर-दूर तक पहुँचाया. वे अपने समय में सबसे अधिक यात्रा करने वालों में से थे. कई स्थानों पर गए और जहां भी गए, वहां, अपनी सरलता, विनम्रता, सादगी से उन्होंने सबका दिल जीत लिया. गुरु नानक देव जी ने कई महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा की, जिन्हें ‘उदासी’ कहा जाता है. सद्भावना और समानता का सन्देश लेकर, वे, उत्तर हो या दक्षिण, पूर्व हो या पश्चिम- हर दिशा में गये, हर जगह लोगों से, संतों और ऋषियों से मिले.” “अभी कुछ दिन पहले ही, करीब 85 देशों के राजदूत, दिल्ली से  अमृतसर गये थे. वहां उन्होंने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के दर्शन किये और ये सब गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के निमित्त हुआ था. वहां इन सारे राजदूतों ने Golden Temple के दर्शन तो किये ही, उन्हें, सिख परम्परा और संस्कृति के बारे में भी जानने का अवसर मिला. इसके बाद कई राजदूतों ने Social Media पर वहां की तस्वीरें साझा की. बड़े गौरवपूर्वक अच्छे अनुभवों को भी लिखा.”

3. लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के किस्से सुनाए
“मुझे विश्वास है कि 31 अक्टूबर की तारीख आप सबको अवश्य याद होगी. यह दिन भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती का है जो देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले महानायक थे. सरदार पटेल में जहाँ लोगों को एकजुट करने की अद्भुत क्षमता थी, वहीं, वे उन लोगों के साथ भी तालमेल बिठा लेते थे जिनके साथ वैचारिक मतभेद होते थे.” “सरदार पटेल बारीक-से-बारीक चीजों को भी बहुत गहराई से देखते थे, परखते थे. सही मायने में, वे ‘Man of detail’ थे. इसके साथ ही वे संगठन कौशल में भी निपुण थे. योजनाओं को तैयार करने और रणनीति बनाने में उन्हें महारत हासिल थी. सरदार साहब की कार्यशैली के विषय है. में जब पढ़ते हैं, सुनते हैं, तो पता चलता है कि उनकी planning कितनी जबरदस्त होती थी.”

“1921 में अहमदाबाद में कांग्रेस के अधिवेशन में शामिल होने के लिए देशभर से हजारों की संख्या में delegates पहुँचने वाले थे. अधिवेशन की सारी व्यवस्था की जिम्मेदारी सरदार पटेल पर थी. इस अवसर का उपयोग उन्होंने शहर में पानी supply के Network को भी सुधारने के लिए किया. यह सुनिश्चित किया कि किसी को भी पानी की दिक्कत न हो.” “यही नहीं, उन्हें, इस बात की भी फिक्र थी कि अधिवेशन स्थल से किसी delegate का सामान या उसके जूते चोरी न हो जाएँ और इसे ध्यान में रखते हुए सरदार पटेल ने जो किया वो जानकर आपको बहुत आश्चर्य होगा. उन्होंने किसानों से संपर्क किया और उनसे खादी के बैग बनाने का आग्रह किया. किसानों ने बैग बनाये और प्रतिनिधियों को बेचे. इन bags में जूते डाल, अपने साथ रखने से delegates के मन से जूते चोरी होने की tension खत्म हो गई. वहीं दूसरी तरफ खादी की बिक्री में भी काफी वृद्धि हुई.” “संविधान सभा में उल्लेखनीय भूमिका निभाने के लिए हमारा देश, सरदार पटेल का सदैव कृतज्ञ रहेगा. उन्होंने मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया, जिससे, जाति और संप्रदाय के आधार पर होने वाले किसी भी भेदभाव की गुंजाइश न बचे.”

4. राम जन्म भूमि विवाद पर बोले पीएम मोदी
“सितम्बर 2010 में जब राम जन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। जरा उन दिनों को याद कीजिये, कैसा माहौल था। भांति-भांति के कितने लोग मैदान में आ गये थे। कैसे-कैसे Interest Groups उस परिस्थितियों का अपने-अपने तरीके से फायदा उठाने के लिए खेल खेल रहे थे। माहौल में गर्माहट पैदा करने के  लिए, किस-किस प्रकार की भाषा बोली जाती थी। भिन्न-भिन्न स्वरों में तीखापन भरने का भी प्रयास होता था। कुछ बयानबाजों ने और कुछ बड़बोलों ने सिर्फ और सिर्फ खुद को चमकाने के इरादे से न जाने क्या-क्या बोल दिया था, कैसी-कैसी गैर – जिम्मेवार बातें की थी हमें सब याद है। लेकिन ये सब, पांच दिन, सात  दिन, दस दिन, चलता रहा, लेकिन, जैसा ही फैसला आया, एक आनंददायक, आश्चर्यजनक बदलाव देश ने महसूस किया। एक तरफ दो हफ्ते तक गर्माहट के लिए सब कुछ हुआ  था, लेकिन, जब राम जन्मभूमि पर फैसला आया तब  सरकार ने, राजनीतिक दलों ने, सामाजिक संगठनों ने, civil society ने, सभी सम्प्रदायों के प्रतिनिधियों ने, साधु-संतों ने बहुत ही संतुलित और संयमित बयान दिए। माहौल से तनाव कम करने का प्रयास। आज मुझे वो दिन बराबर याद है। जब भी उस दिन को याद करता हूँ मन को खुशी होती है। न्यायपालिका की गरिमा को बहुत ही गौरवपूर्ण रूप से सम्मान दिया और कहीं पर भी  गर्माहट का, तनाव का माहौल नहीं बनने दिया। ये बातें हमेशा याद रखनी चाहिए। ये हमें बहुत ताकत देती है। वो दिन, वो  पल, हम सबके लिए एक कर्त्तव्यबोध है। एकता का स्वर, देश को, कितनी बड़ी ताकत देता है उसका यह उदाहरण है।”

5. स्वच्छ भारत की कहानी दूर-दूर तक सुनाई देती है
“आज, घर-घर की अगर कोई एक कहानी सब दूर सुनाई देती है, हर गांव की कोई एक कहानी सुनाई देती है – उत्तर से दक्षिण, पर्व से पश्चिम, हिंदुस्तान के हर कोने से, एक कहानी सुनाई देती है तो वो है स्वच्छता की। हर व्यक्ति को, हर परिवार को, हर गाँव को, स्वच्छता के सम्बन्ध में अपने सुखद अनुभवों कहने का मन करता है, क्योंकि, स्वच्छता का यह प्रयास सवा-सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों का प्रयास है। परिणाम के मालिक भी सवा-सौ करोड़ हिंदुस्तानी ही हैं।”

6. सियाचिन के जवानों को सलाम
“आप कल्पना करिये, विश्व का सबसे ऊंचा battlefield, जहाँ का तापमान शून्य से 50-60 डिग्री minus में चला जाता है। हवा में oxygen भी नाम मात्र की होती है। इतनी विपरीत परिस्थितियों में, इतनी चुनौतियों के बीच रहना भी, किसी पराक्रम से, कम नहीं है। ऐसे विकट हालात में, हमारे बहादुर जवान न सिर्फ सीना तान कर देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं, बल्कि, वहां स्वच्छ सियाचिन अभियान भी चला रहे हैं। भारतीय सेना की इस अद्भुत प्रतिबद्धता के लिए मैं देशवासियों की ओर से उनकी सराहना करता है। वहां इतनी ठण्ड है कि कुछ  भी decompose होना मुश्किल है। ऐसे में, कूड़े-कचरे को अलग करना और  उसका प्रबंधन करना, अपने आप में काफी महत्वपूर्ण काम है। ऐसे में, glacier और उनके आस-पास के इलाके से 130 टन और उससे भी ज्यादा कचरा हटाना और वो भी यहाँ के fragile ecosystem के बीच! कितनी बड़ी सेवा है ये! यह एक ऐसा eco-system है जो हिम तेंदुए जैसी दुर्लभ प्रजातियों का घर है। यहाँ ibex और brown bears जैसे दुर्लभ जानवर भी रहते हैं। हम सब जानते हैं कि यह सियाचिन एक ऐसा glacier है जो नदियों और स्वच्छ पानी का स्त्रोत है इसलिए यहाँ स्वच्छता अभियान चलाने का मतलब है उन लोगों के लिए स्वच्छ जल सुनिश्चित करना जो निचले इलाकों में रहते हैं। साथ ही Nubra और Shyok जैसी नदियों के पानी का उपयोग करते हैं।”