नई दिल्ली: गोवा फारवर्ड पार्टी के प्रमुख और राज्य के कृषि मंत्री विजय सरदेसाई का कहना है कि बीमार चल रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पद से त्यागपत्र देना चाहते थे, लेकिन भाजपा आला कमान ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. उन्होंने कहा कि वह (पर्रिकर) मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहते थे. जब वह गणेश चतुर्थी पर्व पर अस्पताल में भर्ती हुए तो उन्होंने अपने सभी मंत्रालय अन्य मंत्रियों को सौंपने की इच्छा जाहिर की थी. लेकिन उसके बाद कई चीजें हुईं. भाजपा आलाकमान ने इसमें हस्तक्षेप किया. त्यागपत्र देना या न देना पूरी तरह से उनके (पर्रिकर) के हाथ में नहीं था. Also Read - गोवा में कोरोना वायरस ने फिर दी दस्तक, दो नए मामलों के साथ चल रहा 41 संक्रमितों का इलाज

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गौरतलब है कि पर्रिकर अग्नेयाशय की बीमारी से पीड़ित हैं और नई दिल्ली के एम्स से उन्हें 14 अक्टूबर को छुट्टी दी गई थी तब से वे घर पर स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं. एक सवाल के जबाव में उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार के कामकाज पर पर्रिकर की खराब सेहत का असर पड़ा है. Also Read - Lockdown3.0: लॉकडाउन के कारण गोवा में शराब व्यापारियों को अब सताने लगी यह चिंता

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मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के कुछ नेताओं सहित सैकड़ों लोगों ने गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निजी आवास तक मार्च कर उनके इस्तीफे की मांग की थी. प्रदर्शनकारियों ने बीमार मुख्यमंत्री की जगह एक पूर्णकालीन मुख्यमंत्री नियुक्त करने की भी मांग की.पीपुल्स मार्च फॉर रिस्टोरेशन ऑफ गवर्नेंस’ के बैनर तले लोगों ने करीब एक किमी तक मार्च किया और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए पर्रिकर को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया.

कांग्रेस के अलावा राकांपा और शिवसेना सहित अन्य दलों ने भी विरोध मार्च को समर्थन दिया. इस मार्च की पहल सामाजिक कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी संगठनों ने की थी. प्रदर्शनकारियों ने यह मांग की कि पर्रिकर (62) मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें क्योंकि वह बीमार हैं. पुलिस ने प्रदर्शन को मुख्यमंत्री के निजी आवास से 100 मीटर पहले ही रोक दिया.डिप्टी कलेक्टर शशांक त्रिपाठी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खराब स्वास्थ्य के चलते प्रदर्शनकारियों से मिलने से इनकार कर दिया.

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इससे पहले गोवा के राजस्व मंत्री रोहन खुंटे ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के अन्तर्गत आने वाले विभागों के नौकरशाह बीमार नेता की अनुपस्थिति का ‘दुरूपयोग’ कर रहे हैं और सरकारी योजनाओं को रोक रहे हैं. निर्दलीय विधायक खुंटे की टिप्पणी भाजपा की गठबंधन सहयोगी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के दावों के कुछ घंटों बाद सामने आई है जिसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री की बीमारी के कारण राज्य प्रशासन आठ महीने से ‘पूरी तरह से’ ठप है. एमजीपी ने मुख्यमंत्री का पद मंत्री सुदिन धावलिकर को देने की मांग की है. खुंटे ने कहा कि पर्रिकर की अनुपस्थिति में फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं.