नई दिल्ली. गुजरात के अमरेली में स्थित गिर के जंगल के दलखानिया रेंज सरसिया में शेरों की मौत का सिलसिला जारी है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 18 दिनों में वहां 21 शेरों की मौत हो चुकी है. वन विभाग का कहना है कि शेरों की मौत का कारण आपसी संघर्ष और अज्ञात बीमारी है. Also Read - गिर के शेरों के बारे में पीएम मोदी ने साझा की खुशखबरी, आपको जानकारी मिली क्या?

दूसरी तरफ जूनागढ़ के चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (वाइल्डलाइफ) का कहना है कि दलखनिया रेंज में 21 शेरों की मौत हो चुकी है. दूसरी जगह पर शेर के मौत का मामला सामने नहीं आया है. समरदी क्षेत्र से 31 शेरों को बचाया गया है और उनका चेकअप किया जा रहा है. उन्हें सुरक्षित रखने के सभी उपाय किए जा रहे हैं. Also Read - गुजरात के गिर वन में 10 दिन में 11 शेरों की मौत, सरकार ने दिए जांच के आदेश

460 शेरों की हुई स्कैनिंग
गिर में शेरों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है जिसे लेकर वन विभाग में खासी अफरा तफरी मची हुई है. शेरों की मॉनिटरिंग और स्कैनिंग के लिए गिर के जंगल में 140 टीम बनाई गई हैं जिसके 585 कर्मचारियों के जरिए रेंज के शेरों पर नजर रखी जा रही है. वन विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को मीडिया को यह जानकारी देते हुए बताया कि 14 शेरों की मौत के बाद यह अभियान को और तेज कर दिया गया है.

कड़ी निगरानी कर रहा विभाग
गिर-पूर्वी संभाग में डलखानिया रेंज और इसके आसपास 11 शेरों की मौत के बाद 24 सितंबर को वन विभाग ने गिर वन में शेरों की पहचान और बचाव के लिए एक अभियान चलाया था. लेकिन पिछले सप्ताह अभियान के दौरान तीन और शेर मारे गए जिससे मृत शेरों की संख्या 14 हो गई. वन विभाग का दावा है कि जब शेरों को भर्ती कराया गया था तो वे पहले से ही गंभीर रूप से बीमार थे और काफी प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया न जा सका हालांकि भर्ती कराए गए अन्य शेरों के स्वास्थ्य की कड़ी निगरानी की जा रही है.