नई दिल्ली. विपक्षी दलों के कई नेता 2019 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी गठबंधन की ओर से किसी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किए जाने के खिलाफ लगते हैं. विपक्षी खेमे के सूत्रों ने यह जानकारी दी. विपक्षी खेमे की प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को विपक्ष के प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी होना चाहिए क्योंकि उनमें भाजपा को शिकस्त देने की क्षमता है. स्टालिन ने रविवार को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एम. करुणानिधि की प्रतिमा के अनावरण के मौके पर आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए यह बयान दिया था.

विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, ‘‘विपक्ष के कई नेता प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में किसी का नाम घोषित किए जाने के खिलाफ हैं. सपा, तेदेपा, बसपा, तृणमूल और राकांपा स्टालिन की घोषणा से सहमत नहीं है. यह जल्दीबाजी है. लोकसभा परिणामों के बाद ही प्रधानमंत्री का निर्णय होगा.’’ स्टालिन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए वाम नेता डी. राजा ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि इस मामले पर सभी लोकतांत्रिक पार्टियों, वामपंथी दलों को गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए. हालांकि आने वाले दिनों में देखेंगे कि स्थिति कैसी बनती है.

द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने रविवार को राहुल गांधी को 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के लिए उनका पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि गांधी वंशज में ‘फासीवादी’ नरेन्द्र मोदी सरकार को हराने की क्षमता है. इससे पहले यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा विरोधी सभी विपक्षी दलों से एक मंच पर आने की अपील की. चेन्नई में आयोजित सभा में भाजपा का जाहिर तौर पर हवाला देते हुए सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘यह मेरी इच्छा है कि एक दूसरे के प्रति हमारी पार्टियों का परस्पर सहयोग मजबूत बना रहना चाहिए, ठीक उसी तरह जैसा कि करुणानिधि जी हमारा मार्गदर्शन करते थे…, और जैसा कि आप सब जानते हैं, हमें, हमारे संवैधानिक मूल्यों, हमारे संस्थानों और भारत के विचार को नष्ट करने पर उतारू राजनीतिक ताकतों से एक होकर लड़ना है.’’