महाराष्ट्र के मराठा समाज ने अपना आन्दोलन बढाने का फैसला किया है, जिसका एक रूप नासिक के बाद रविवार को पुणे में मराठा मौन मोर्चा के नाम पर लाखों की भीड़ जुटने पर दिखाई दिया। इस जनसैलाब केव इकट्ठा होने के बाद सीएम देवेंद्र फडनवीस को भी बयान देने पर मजबूर होना पड़ा। अपने बयान में फडनवीस ने कहा कि मराठाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। बताया जा रहा है कि  इन बड़े मोर्चों का नेतृत्व ना तो कोई नेता कर रहा है और ना कोई राजनीतिक पार्टी, जिससे इन राजनीतिक पार्टियों का परेशान होना स्वाभाविक है।

 इस आन्दोलन की तुलना गुजरात के पाटीदार आंदोलन से भी किया जा रहा है। लेकिन इस आन्दोलन के नेतृत्व की डोर हार्दिक पटेल जैसे किसी के हाथ में नही है, लेकिन इस आन्दोलन को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया काफी मददगार साबित हो रहा है। ये भी पढ़ें: वडा पाव बेचनेवाले ने सूखाग्रस्त राहत कोष के लिए दिए 20 हज़ार रूपए

बता दें कि आनंदीबेन को पिछले साल पाटीदार आरक्षण आंदोलन का सामना करना पड़ा था, जिसपर काबू करने में आनंदीबेन पूरी तरह विफल रहीं और इन कारणों की वजह से आनंदीबेन को कुर्सी भी गंवानी पड़ी।

अब महाराष्ट्र की कमान संभालने के बाद अपनी इमेज को ध्यान में रखने के लिए फडनवीस ने बयान दिया है कि ‘मैं कितने दिन तक मुख्यमंत्री पद पर रहूंगा, इसकी मुझे कोई परवाह नहीं है। लेकिन जब तक मैं मुख्यमंत्री पद पर हूं, तब तक परिवर्तन के लिए काम करता रहूंगा।’