गुजरात के अहमदाबाद में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां प्याज-लहसुन को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि 23 साल की शादी टूट गई. मार्च 2002 में हुई इस शादी का अंत गुजरात हाईकोर्ट के फैसले से हुआ, जब पत्नी की धार्मिक मान्यताओं और पति की खाने की आदतों का टकराव फैमिली कोर्ट से होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंचा. पत्नी स्वामिनारायण संप्रदाय की अनुयायी हैं, जो इन मसालों को अशुद्ध मानती हैं.विवाद की शुरुआतशादी के शुरुआती सालों में सब ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे पत्नी ने स्वामिनारायण संप्रदाय की सखी मंडल जॉइन की.
इस संप्रदाय में प्याज-लहसुन न खाने का सख्त नियम है. पति, जो इन्हें रोजमर्रा का हिस्सा मानते थे, ने पत्नी से इन्हें मिलाकर खाना बनाने की मांग की. पत्नी ने इनकार कर दिया, जिससे घरेलू कलह शुरू हो गया.
पति का तलाक आवेदन
2010 के आसपास विवाद चरम पर पहुंचा. पति ने फैमिली कोर्ट में क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की याचिका दायर की. उन्होंने कहा कि पत्नी ने न केवल खाना बनाना बंद कर दिया, बल्कि अलग-अलग रसोई चलाने लगीं. कोर्ट ने इसे वैवाहिक क्रूरता माना और तलाक मंजूर कर लिया.
पत्नी की अपील और हाईकोर्ट का फैसला
पत्नी ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में अपील की, जिसमें अधिक भरण-पोषण की मांग भी की. लेकिन हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में अपील खारिज कर दी. जस्टिस ने कहा कि धार्मिक विश्वासों का सम्मान जरूरी है, लेकिन वैवाहिक जीवन में समझौता भी आवश्यक. पत्नी को मौजूदा भरण-पोषण राशि ही मिली.स्वामिनारायण संप्रदाय की भूमिकास्वामिनारायण संप्रदाय गुजरात में लाखों अनुयायियों वाला है, जहां शाकाहारी भोजन में प्याज-लहसुन वर्जित हैं. पत्नी की सखी मंडल सदस्यता ने उनकी आस्था मजबूत की, लेकिन घरेलू सुख छीन लिया. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे धार्मिक टकराव शादियों में आम हो रहे हैं.
सामाजिक प्रभाव और सबक
यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां लोग धार्मिक कट्टरता vs वैवाहिक समझौते पर बहस कर रहे हैं. वकीलों का मानना है कि प्री-मैरिटल काउंसलिंग से ऐसे विवाद टल सकते हैं. गुजरात में तलाक के मामलों में 20% घरेलू झगड़ों से जुड़े हैं. तलाक के बाद पति-पत्नी अलग हो चुके हैं. पत्नी अब संप्रदाय की गतिविधियों में सक्रिय हैं, जबकि पति नई जिंदगी शुरू करने को तैयार.
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