तेलंगाना सरकार का शादीशुदा महिलाओं को लेकर एक अजीबोगरीब फरमान सामने आया है। सरकार के एक आदेश के मुताबिक सिर्फ अविवाहित महिलाएं ही समाज कल्याण आवासीय डिग्री कॉलेजों में प्रवेश ले सकती हैं। इसके पीछे सरकार का तर्क है कि शादीशुदा महिलाओं की वजह से दूसरे छात्रों का ध्यान पढ़ाई से भटकता है।  राज्य में कुल 23 महिला आवासीय कॉलेज हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ये नियम सालभर के लिए लागू किया गया है। 23 आवासीय कॉलेजों के करीब चार हजार सीटों पर इसी नियम के तहत प्रवेश दिया जाएगा। ये फरमान सोशल वेलफेयर रेजिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स सोसायटी ने जारी किया है। सोसायटी की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक साल 2017-18 में बीए,बीकॉम,बीएससी-फर्स्ट ईयर के लिए गैर शादीशुदा महिलाएं ही आवेदन कर सकती हैं।

सोसायटी के कंटेंट मैनेजर बी वेंकट राजू ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि शादीशुदा महिलाओं के पति हफ्ते में एक या दो बार पत्नी से मिलने आते हैं। इससे बाकी महिलाओं का ध्यान भटक सकता है। वहीं सोसाइटी के सेक्रेटरी डॉ. आरएस प्रवीन कुमार ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में महिलाओं के लिए आवासीय डिग्री कॉलेज बनाने का मकसद बाल विवाह की प्रथा को तोड़ना है।

राज्य सरकार के इस फरमान का विरोध होना शुरू हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार का ये कदम शादी जैसे पवित्र बंधन का अपमान है। इनका कहना है कि जब राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर बाल विवाह हो रहे हैं तो इन्हें शिक्षा लेने से कैसे रोका जा सकता है।