उत्तर प्रदेश के मथुरा में गुरुवार को सरकारी जमीन पर से अवैध कब्जा हटाने पहुंची पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला बोल दिया। अवैध कब्जाधारियों की ओर से की गई फायरिंग में एक एसओ और एसपी की मौत हो गई। पुलिस और कब्‍जेधारियों के लिए बीच हुए भीषण संघर्ष में एसपी (सिटी) मुकुल द्विवेदी और थाना प्रभारी संतोष कुमार की मौत हो गई और 12 पुलिसवाले घायल हुए हैं। वहीं दूसरी ओर यूपी सीएम अखिलेश सिंह यादव ने निजी सचिव और डीजीपी को मथुरा कांड की जांच करने का निर्देश दिया है।Also Read - Alert in Mathura: ईदगाह में जलाभिषेक के ऐलान पर मथुरा में अलर्ट, प्रशासन ने कहा- किसी को घुसने की अनुमति नहीं

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इस हिंसा में 19 उपद्रवियों की भी मौत हुई है तथा 40 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश समेत पुरे भारत में इसकी चर्चा हो रही है। गौरलतब हो इस घटना की शुरुवात तब हुई जब 3000 अतिक्रमणकारियों ने पुलिस दल के मौके पर पहुंचने पर उस पर पथराव किया और फिर गोली चलाई। उसके जवाब में पुलिस ने भी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पहले लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े और जब भीड़ नही की तरफ से हमला होता रहा तब फिर जवाबी कार्रवाई के तहत गोली चलाई। यह भी पढ़ें : उप्र : वाराणसी में हिंसा के बाद हालात सामान्य, स्कूल-कॉलेज बंद Also Read - Mathura: चोरी किए गए डेढ़ करोड़ रुपये के 1589 मोबाइल फोन के साथ पांच व्यक्ति गिरफ्तार

बता दें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर आगरा के मण्डलायुक्त को जांच अधिकारी नामित किया गया है। फिलहाल दो दिन पहले प्रशासन ने जवाहर बाग में कब्‍जा किए सत्याग्रहियों को नोटिस देते हुए 24 घंटे में जवाहर बाग को खाली करने की चेतावनी दी थी। इस घटना के बाद अखिलेश यादव ने शहीद थानाध्यक्ष के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके परिजनों को 20 लाख रूपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।