गुरुवार को शुरु हुई मथुरा की विनाश लीला में अब तक 368 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन अभी तक इस खून की होली के कंस रामवृक्ष यादव का कोई सुराग नहीं लगा। इस घटना में दो जाँबाज पुलिस वालों समेत 27 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हैं। पुलिस ने मथुरा के जवाहर बाग की खूनी जमीन को पूरी तरह से कब्जा मुक्त करा लिया है। यह भी पढ़ेंः मथुरा हिंसा पर बिफरीं मायावती, अखिलेश से इस्तीफा मांगाAlso Read - आगरा में मृत सफाई कर्मचारी अरुण वाल्मीकि के परिवार से म‍िलीं प्रियंका गांधी, प्रशासन 10 लाख रुपए और एक सदस्य को नौकरी देगा

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कहाँ गया मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव Also Read - UP: 25 लाख की चोरी के मामले में सफाईकर्मी की हिरासत में मौत पर हंगामा, आगरा जा रहीं प्र‍ियंका गांधी हिरासत में

घटना के 48 घंटे बाद भी मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव का कोई सुराग नहीं लगा। हालाकि कल उसके घायल होने की खबर आ रही थी लेकिन वो अफवाह साबित हुई। पुलिस उसके बारे में कुछ भी स्पष्ट बोलने को तैयार नहीं है। इस पूरी विनाशलीला के मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव पर 20 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

अपनी सेना के साथ रामवृक्ष यादव... (साभार- आईबीएन)

अपनी सेना के साथ रामवृक्ष यादव… (साभार- आईबीएन)

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में रायपुर बाघपुर का रहने वाला रामवृक्ष यादव खुद को स्वयंभू सम्राट कहता था। मथुरा के जवाहर बाग में वो अपना दरबार लगाता था। इस बाग पर कब्जा करने का एक उद्देश्य यह भी था कि वह अपने अच्छे बुरे कामों का साम्राज्य संचालित कर सके। बताते हैं कि रामवृक्ष यादव शुरुआत से ही उग्र स्वभाव का था। उसके इसी जयगुरुदेव ने उसे अपने आश्रम से निकाल दिया था। इसके बाद उसने हथियार बंद लोगों को जुटाना शुरू किया और अपनी एक समानांतर सरकार चलाने लगा।

हमारे सूत्रों के अनुसार उसके पास एक कमांडर था जो नवयुवकों को देश की सेवा और सुभाष चंद्र बोस के नाम पर अपने गैंग में भर्ती करता था। उन्हें हथियारों की ट्रेनिंग भी देता था। मथुरा के जवाहर बाग में पिछले दो साल से यह खेल सत्याग्रह के नाम पर चल रहा था। ऐसे में कुछ बड़े सवाल उठते हैं कि बिना शासन के शह के इतना बड़ा गैंग कैसे संचालित हो सकता है। अगर प्रशासन इससे अनभिज्ञ था तो यह और भी बड़ी विफलता है। लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि रामवृक्ष यादव कहाँ है…? यह भी पढ़ेंः अखिलेश ने दिए जांच के आदेश, भाजपा की सीबीआई जांच की मांग

ये है पूरा मामला

पुलिस मथुरा के जवाहर बाग की लगभग 250 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा हटाने पहुँची थी। बताया जा रहा है कि यह जमीन सरकारी नर्सरी की है जिस पर करीब तीन हजार लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था। प्रशासन पहले भी कई बार उन्हें हटाने का प्रयास कर चुका है लेकिन तब वो कोर्ट चले गये। जब कोर्ट ने भी जमीन खाली करने का आदेश दे दिया तो प्रशासन ने 2 दिन पहले उन्हें बाग पर कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया। इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों ने कब्जा नहीं हटाया बल्कि वो आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हो गए। जिले की पुलिस जब जवाहर बाग पहुँची तो वहाँ करीब 3 हजार लोग थे। पुलिस ने जैसे ही बाग के बाहर की दीवार तोड़ना शुरू किया लोगों ने फायरिंग कर दी। इससे अफरा-तफरी मच गई। भीड़ से निकली गोली की चपेट में एसपी और एसओ भी आ गए। पुलिस की जवाबी फायरिंग में कई और जानें चली गईं। यह भी पढ़ेंः मथुरा में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस पर हमला, 2 पुलिसवालों समेत 27 की मौत