त्रिवेंद्रम। मई दिवस यानि मजदूर दिवस पर त्रिवेंद्रम में एक अधिकारी ने अपने कर्तव्य के प्रति सच्ची लगन की मिसाल दी. केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के एमडी टी जे थचनकेरी ने एक बस में खुद कंडक्टर बनकर काम किया. इस दौरान थचनकेरी ने यात्रियों के टिकट काटे साथ ही टिकटों की जांच भी की. उन्होंने यात्रियों से उनकी दिक्कतों और अनुभव के बारे में भी जानकारी ली.

थचनकेरी ने कहा कि जब तक मुझे पता नहीं होगा कि कंडक्टर काम कैसे करते हैं, मैं उनका नेतृत्व कैसे कर सकता हूं. इससे मुझे यात्रियों के साथ संवाद करने का भी मौका मिला है. इससे हमें यात्रियों के लिए बेहतर सुविधा मुहैया कराने में मदद मिलेगी. एमडी को अपने बीच पाकर यात्री भी खुश नजर आए और अपनी परेशानियां, अनुभव साझा किए.

कंडक्टर की वर्दी पहने थचनकेरी ने कहा कि मेरे निगम के महत्वपूर्ण भागों की जिम्मेदारी चालक और कंडक्टर निभाते हैं, जिनकी संख्या 32,000 है. इसलिए मैंने सोचा कि मैं कंडक्टर बन जाऊं. गुरुवयूर जाने वाली यह बस तिरुवनंतपुरम में आधी भरी हुई थी. बस के यात्री एक वरिष्ठ अधिकारी से टिकट लेकर आश्चर्यचकित थे. थचनकेरी ने इस बस से थिरुवाला तक यात्रा की. उन्होंने कहा कि मैं जल्द ही चालक बनूंगा. मैंने लाइसेंस के लिए पहले ही आवेदन कर दिया है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक थचनकेरी को दो सप्ताह पहले केएसआरटीसी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.

1 मई को मजदूर दिवस

बता दें कि आज यानि 1 मई को दुनिया भर में मई दिवस/मजदूर दिवस मनाया जाता है. इस दिन कई देशों में नेशनल हॉलिडे मनाया जाता है. आज ही के दिन अनिश्चित काम के घंटों को 8 घंटे में तब्दील किया गया था. इस मौके पर गूगल ने भी अपना डूडल मई दिवस को ही समर्पित किया है.

गूगल-डूडल इस तरह मना रहा है अंतरराष्ट्रीय लेबर डे 2018

1 मई 1886 को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मजदूर दिवस मनाने की शुरूआत हुई थी. हर साल पूरी दुनिया में एक मई को लेबर-डे मनाया जाता है. इस दिन दुनिया के अधिकांश देशों में छुट्टी होती है. भारत में इसे अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में जाना जाता है. यूरोप के ज्यादातर हिस्सों में मई-डे के रूप में जाना जाता है.

दुनिया में मजदूर दिवस मनाने का चलन करीब 132 साल पुराना है. मजदूरों ने काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर 1877 में आंदोलन शुरू हुआ था, इस दौरान यह दुनिया के विभिन्न देशों में फैलने लगा. एक मई 1886 को पूरे अमेरिका के लाखों मजदूरों ने एक साथ हड़ताल शुरू की. इसमें 11,000 फैक्टरियों के कम से कम तीन लाख अस्सी हजार मजदूर शामिल हुए और वहीं से एक मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई.