नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में बसपा के समर्थन से सपा उम्मीदवारों की जीत के बाद राष्ट्रीय स्तर पर बसपा की मांग बढ़ गई है. कई राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियां मायावती की पार्टी के साथ गठबंधन के लिए हाथ बढ़ा रही हैं. कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर के साथ गठबंधन करने के बाद बसपा ने एक और क्षेत्रीय दल से गठबंधन किया है. पार्टी ने दो दिन पहले ही हरियाणा में नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) के साथ गठबंधन की घोषणा की है. ये दोनों दल हरियाणा में मिलकर चुनाव लड़ने के साथ इसी साल नवंबर में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी एक साथ हाथ आजमाएंगे.Also Read - UP: मायावती सरकार में मंत्री रहे BSP के दो पूर्व नेता लालजी वर्मा, रामअचल राजभर ने SP में किया शामिल होने का ऐलान

वर्ष 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में बसपा को 4.37 फीसदी वोट मिले थे. पार्टी ने 87 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से उसे एक सीट मिली थी. दूसरी तरफ आईएनएलडी को 90 में से 19 सीटें मिली थीं. हालांकि उसका वोट शेयर 24.11 फीसदी थी. वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक हरियाणा की करीब 2 करोड़ की आबादी में 20 फीसदी दलित समुदाय हैं. Also Read - UP Election 2022: BSP के 'जाटव' वोटों में सेंध की तैयारी में BJP, मायावती के खिलाफ प्रत्याशी के नाम पर मुहर

कर्नाटक में भी है गठबंधन
हरियाणा से पहले बसपा ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस के साथ गठबंधन किया था. कर्नाटक में 12 मई को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. कर्नाटक में 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 175 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसे केवल 0.91 फीसदी वोट मिले थे. दूसरी तरफ जेडीएस ने 40 सीटें जीती थी. उसे 20.19 फीसदी वोट मिले थे. कर्नाटक की 6.5 करोड़ की आबादी में दलितों की हिस्सेदारी करीब 19.5 फीसदी है. Also Read - UP Assembly Election 2022: मायावती ने की चुनावी सर्वेक्षणों को रोकने की मांग, कहा- इससे तो चुनाव भी...

यूपी में सपा-बसपा गठबंधन
वैसे तो उत्तर प्रदेश के हाल के उपचुनाव में कांग्रेस सपा-बसपा गठबंधन में शामिल नहीं हुई थी लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी (कांग्रेस) इस साल के अंत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनाव में बसपा का साथ चाहती है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इस साल एक साथ चुनाव होने वाले हैं. बसपा के नेता भी इन तीनों राज्यों से भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिलाना चाहते हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा 2003 से लगातार सत्ता में है. बसपा के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के प्रभारी एमएल भारती ने पिछले माह रायपुर में कहा था कि उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए तैयार है. हालांकि उन्होंने कहा था कि यह काफी हद तक कांग्रेस पर निर्भर करता है कि वह बसपा को संतोषजनक सीटें देती है या नहीं. प्रदेश कांग्रेस प्रमुख भुपेश बघेल ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनकी पार्टी बसपा के साथ गठबंधन की इच्छुक हैं. लेकिन हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में बसपा के एक मात्र विधायक ने भाजपा प्रत्याशी को अपना वोट दिया था. वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था. उसे कुल 4.27 फीसदी वोट मिले थे. राज्य की 2.6 करोड़ की आबादी में करीब 11.6 फीसदी दलित हैं.

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के साथ हो सकता है गठबंधन
यही हाल मध्य प्रदेश का है. राज्य के कांग्रेस प्रमुख अरुण यादव ने भी बसपा के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया है. इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ ने अजय सिंह और चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी ने भी बसपा के बात करने की वकालत की थी. पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा ने 230 में 227 सीटों पर चुनाव लड़ा था. पार्टी ने चार सीटें जीती भी थी. उसके 6.29 फीसदी वोट मिले थे. राज्य के बुंदेलखंड इलाके में पार्टी की ठीकठाक वोटर हैं. बसपा ने 2016 में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के विवेक तनखा का समर्थन किया था. राज्य की करीब 7.5 करोड़ की आबादी में 15 फीसदी दलित हैं.