लखनऊ। गोरखपुर और फूलपुर उप चुनावों में समाजवादी पार्टी (सपा) की जीत में बड़ी भूमिका निभाने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने आज समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका दिया. मायावती ने कहा कि बसपा भविष्य में इस तरह की ‘सक्रिय भूमिका’ नहीं निभाएगी. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पार्टी नेताओं, पदाधिकारियों और विधायकों के साथ सोमवार को एक बैठक में कहा कि वह कैराना संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के उप चुनाव में गोरखपुर की तरह का ‘चुनावी तालमेल’ बनाने की इच्छुक नहीं हैं. अब तक कयास लगाए जा रहे थे कि कैराना उपचुनाव में भी गोरखपुर-फूलपुर जैसा ही गठबंधन होगा. Also Read - Rajasthan में 6 बीएसपी MLA का कांग्रेस में विलय के मामले में SC ने जारी किया स्‍पीकर और विधायकों को नोटिस

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हालांकि, उन्होंने बसपा-सपा के 2019 के आम चुनावों में गठबंधन के पर्याप्त संकेत दिए. कैराना सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई है. बसपा द्वारा नूरपुर विधानसभा सीट उप चुनाव में भी किसी दल को समर्थन देने की संभावना नहीं है. नूरपुर विधानसभा सीट भाजपा विधायक की सड़क दुर्घटना में निधन से खाली हुई है.

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मायावती ने अपने समर्थकों से कहा कि वे पार्टी मशीनरी को फिर से मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करें, जिसे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और स्वामी प्रसाद मौर्या जैसे दिग्गज नेताओं के पार्टी छोड़कर जाने से नुकसान पहुंचा है. बसपा छोड़ने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्या भाजपा में शामिल हुए और राज्य की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने, जबकि बसपा का कभी अल्पसंख्यक चेहरा रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.

बसपा के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि बसपा सुप्रीमो कभी कट्टर प्रतिद्वंदी रहे समाजवादी पार्टी के साथ ‘व्यावहारिक गठबंधन’ तो चाहती हैं, लेकिन यह नहीं चाहतीं कि ऐसा संदेश जाए कि वह सपा को बहुत ज्यादा तरजीह दे रहीं हैं.

उपचुनाव में बीजेपी को हराया

बता दें कि बसपा के समर्थन से ही सपा ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को करारी मात दी थी. गोरखपुर सीट सीएम योगी आदित्यनाथ और फूलपुर सीट डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. दोनों सीटों पर सपा ने जीत हासिल कर सियासी पंडितों को हैरान कर दिया. इसी के साथ 2019 में सपा-बसपा दोस्ती का रास्ता भी साफ हो गया. 2014 लोकसभा चुनाव में सपा को महज 5 सीटें जबकि बीएसपी के खाते में एक भी सीट नहीं आई.