नई दिल्ली. कांग्रेस ने रविवार को ऐलान किया था कि आगामी लोकसभा चुनाव में वह सपा—बसपा—रालोद गठबंधन के लिए सात सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी. इसके बाद सोमवार को बसपा सुप्रीमो मायावती का इस पर बयान आया है. उन्होंने कहा है कांग्रेस यूपी में भी पूरी तरह से स्वतंत्र है कि वह यहां की सभी 80 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करके अकेले चुनाव लड़े. आर्थात हमारा यहां बना गठबंधन अकेले बीजेपी को पराजित करने में पूरी तरह से सक्षम है. कांग्रेस जबर्दस्ती यूपी में गठबंधन हेतु 7 सीटें छोड़ने की भ्रान्ति ना फैलाए.

एक अन्य ट्वीट में मायावती ने कहा, बीएसपी एक बार फिर साफ तौर पर स्पष्ट कर देना चाहती है कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में कांग्रेस पार्टी से हमारा कोई भी किसी भी प्रकार का तालमेल व गठबंधन आदि बिल्कुल भी नहीं है. हमारे लोग कांग्रेस पार्टी द्वारा आयेदिन फैलाए जा रहे किस्म-किस्म के भ्रम में कतई ना आएं.

राज बब्बर ने ये भी कहा
बता दें कि यूपी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राज बब्बर ने बताया था कि सपा—बसपा—रालोद के लिए सात सीटें हम छोड़ रहे हैं. इनमें मैनपुरी, कन्नौज और फिरोजाबाद शामिल हैं. इसके अलावा पार्टी उन सीटों पर किसी प्रत्याशी को नहीं उतारेगी, जिन पर बसपा सुप्रीमो मायावती, रालोद प्रमुख अजित सिंह और उनके बेटे जयंत के चुनाव लड़ने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि गठबंधन ने रायबरेली और अमेठी सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ी हैं. उसी क्रम में हम गठबंधन के लिए सात सीटें छोड़ रहे हैं.

बब्बर ने ये कहा
बब्बर ने बताया कि कांग्रेस ने गोण्डा और पीलीभीत सीटें अपना दल को देना तय किया है. उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने जन अधिकार पार्टी के साथ चुनावी समझौता किया है. पांच सीटों पर जन अधिकारी पार्टी के प्रत्याशी होंगे जबकि दो सीटों पर जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशी कांग्रेस के निशान पर चुनाव लड़ेंगे. जन अधिकार पार्टी के संस्थापक बाबू सिंह कुशवाहा हैं. बसपा सरकार के समय वह मंत्री थे और मायावती के करीबी माने जाते थे.