नई दिल्लीः लौह पुरुष सरदार बल्लभभाई पटेल की आज 143वीं जयंती है. देश को एकजुट रखने में उनके साहसिक योगदान पर सवाल नहीं उठाए जा सकते. तभी तो आज उनके जन्मदिन पर उनकी 522 फीट (182 मीटर) ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया गया. लेकिन इस महान हस्ती की इतनी बड़ी प्रतिमा को आकार देने वाले एक दूसरे महान हस्ती भी हैं. वो हैं राम वांजी सुतार. जी हां ये वही शख्स हैं जिन्होंने इस प्रतिमा को डिजाइन किया है. 93 वर्षीय राम सुतार आज देश और दुनिया के एक सबसे बड़े मूर्तिकार हैं.

पिछले दिनों हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में राम सुतार ने कहा था कि जब वह युवा थे तो उन्होंने न्यूयॉर्क में ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ देखी थी. वह उससे काफी प्रभावित हुए थे. उसी समय से वह एक मूर्तिकार बनना चाहते थे. उनका सपना था कि वह एक ऐसा स्टैच्यू बनाएं जो फ्रेंच मूर्तिकार फ्रेडरिक ऑगस्त बारथोल्डी द्वारा बनाए गए 305 फीट की ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ से बड़ा हो. राम सुतार का यह दशकों पुराना सपना आज पूरा हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरदार पटेल की 522 फीट ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का लोकार्पण करने जा रहे हैं. ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ सरदार सरोवर बांध के पास नर्मदा नदी में एक द्वीप पर बना हुआ है. इस स्टैच्यू के बारे में बात करते हुए राम सुतार बड़े गर्व से कहते हैं कि यह ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ के करीब-करीब दोगुना है.

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के श्रृजनकर्ता राम सुतार. (फोटो- फेसबुक)

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के सृजनकर्ता राम सुतार. (फोटो- फेसबुक)

8 हजार से अधिक प्रतिमाओं का कर चुके हैं निर्माण
2014 में सरदार पटेल की इस प्रतिमा के निर्माण का काम मिलने से काफी पहले से राम सुतार देश-दुनिया के जानेमाने मूर्तिकार थे. एक मूर्तिकार के रूप में करीब 70 सालों से काम कर रहे राम सुतार अब तक 8 हजार से अधिक मूर्तियां बना चुके हैं, जिसमें से अधिकतर कांसे की हैं. मानव इतिहास के बड़े मूर्तिकारों के बारे में विस्तृत अध्ययन उपलब्ध नहीं होने के कारण इनकी किसी से तुलना नहीं जा सकती लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि बीते 100 सालों में वह दुनिया के एक सबसे महान मूर्तिकार हैं. अमेरिका के प्रसिद्ध अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने राम सुतार के बारे में कुछ ऐसी ही टिप्पणी की थी.

‘द स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के बारे में राम सुतार कहते हैं कि अब तक उन्होंने जितनी भी परियोजनाओं पर काम किया उसमें सबसे चुनौती भरी परियोजना यही थी. इससे पहले उन्होंने 1959 में मध्य प्रदेश के गांधी सागर बांध में देवी चंबल की 45 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण करवाया था. उनका कहना है कि जब आप 522 फीट ऊंची किसी प्रतिमा का निर्माण करते हैं तो उसका व्यक्तित्व, पोज, चेहरे का एक्प्रेशन जैसी कई चीजें होती हैं, जिनको डिजाइन करना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है. हर चीज को आपको उचित टेक्स्चर के साथ सृजित करना पड़ता है. सरदार पटेल की प्रतिमा का अंतिम मॉडल तैयार करने में उनको एक साल से अधिक समय लगा.

उनके बेटे अनिल सुतार जो खुद एक आर्टिटेक्ट और मूर्तिकार हैं, ने बताया कि शुरू में उनके स्टूडियो में पहले 3 फीट की प्रतिमा का निर्माण किया गया, जिसे मिट्टी से पहले 18 फीट और फिर 30 फीट का बनाया गया. इसके बाद इसे 3D इमैज की सहायता से थर्मोकॉल में पूरे 522 फीट का बनाया गया. इस स्टैच्यू को राम सुतार के नोएडा स्थित स्टूडियो में डिजाइन किया गया, लेकिन इसे चीन के नानचंग में कांसे में ढाला गया. इस स्टैच्यू को बनाने में 177 टन कांसे का इस्तेमाल किया गया. इसके लिए उन्हें और उनके बेटे को कई बार चीन जाना पड़ा. इस प्रतिमा को टुकड़ों में गुजरात लाया गया और वहां उसको एसेम्बल किया गया.