नई दिल्ली. देश की राजधानी में कल यानी 17 जून को नीति आयोग के चौथे संचालन परिषद की बैठक होने वाली है. इसके लिए कई राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली आए हुए हैं. कहने को तो यह बैठक राज्यों के विकास के लिए होगी, लेकिन आज देर शाम इस बैठक से पहले गैर-भाजपा शासित राज्यों के सीएम एक-दूसरे से मिले और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. आंध्रप्रदेश भवन में हुई इन मुख्यमंत्रियों की मुलाकात, हालिया विपक्षी एकता को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है. मई के आखिरी सप्ताह में कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के शपथग्रहण में दिखी गैर-भाजपा दलों की एकता के बाद नई दिल्ली में इन विपक्षी नेताओं की मुलाकात को आगामी लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. भाजपा विरोध के बरक्स सियासी जानकार, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, केरल के सीएम पी. विजयन और कर्नाटक के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री कुमारस्वामी की इस मुलाकात को रणनीतिक बता रहे हैं.

हालांकि इन चारों मुख्यमंत्रियों की यह मुलाकात प्रत्यक्ष तौर पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के आईएएस अफसरों की हड़ताल के विरोध में पिछले कुछ दिनों से उपराज्यपाल के आवास पर धरना देने के समर्थन में है. सीएम ममता बनर्जी ने तो खुले तौर पर अरविंद केजरीवाल के कदम का समर्थन भी किया है. आज देर शाम इन चारों मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल को एक पत्र लिखा. इस पत्र में सभी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के मुद्दे पर उपराज्यपाल से रात 9 बजे मिलने का समय मांगा है.

ममता बनर्जी की दिलचस्पी पर नजर
दिल्ली में आज शाम जिन 4 राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मुलाकात आंध्रप्रदेश भवन में हुई, उसमें पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और आंध्रप्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू की मुलाकात महत्वपूर्ण है. केंद्र की नीतियों को खुले तौर पर चुनौती देने वाली ममता बनर्जी विपक्षी दलों की एकजुटता को लेकर पिछले कुछ दिनों में ज्यादा सक्रिय रही हैं. आज शाम वह खुद आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू से मिलने आंध्रप्रदेश भवन पहुंची थीं. इससे पहले ये दोनों नेता एक साथ कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण में एक साथ पहुंचे थे. उस समय दोनों नेताओं ने कहा था कि क्षेत्रीय दलों की एकजुटता से ही भाजपा को हराया जा सकता है. ऐसे में एक महीने के अंदर इन नेताओं की दोबारा मुलाकात को लेकर सियासी अटकलें लगना स्वाभाविक है. ममता आज ही शाम दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से भी मिलेंगी. यह बात भी गौरतलब है कि ममता ने एक दिन पहले ही इस बात की पुष्टि की थी कि वह नई दिल्ली में नीति आयोग की 17 जून को पुनर्निर्धारित बैठक में शामिल होंगी. पीएम की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक पहले 16 जून को होने वाली थी, लेकिन ईद के कारण इसे एक दिन आगे बढ़ा दिया गया.

आंध्रप्रदेश भवन में सीएम चंद्रबाबू नायडू से मिलने पहुंचीं सीएम ममता बनर्जी.

आंध्रप्रदेश भवन में सीएम चंद्रबाबू नायडू से मिलने पहुंचीं सीएम ममता बनर्जी.

 

एक तिहाई से ज्यादा लोकसभा सीटों पर पकड़
दिल्ली में नीति आयोग की बैठक से पहले गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मुलाकात, लोकसभा चुनाव और उसकी सीटों की दृष्टि से भी अहम है. आंध्रप्रदेश भवन में पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई. गौर करें तो इन चारों राज्यों में कुल 128 लोकसभा सीटें (तेलंगाना सहित) हैं. आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 42-42, केरल में 20 और कर्नाटक में 28 सीटें. यानी ये लोकसभा की कुल 543 सीटों का एक तिहाई है. इन चारों राज्यों में से तेलंगाना की कुछ सीटों को छोड़ दें और कर्नाटक में कांग्रेस के मुकाबले कमजोर कुमारस्वामी की जेडीएस पार्टी को किनारे कर दें, तो भी पश्चिम बंगाल, केरल और आंध्रप्रदेश अपने दम पर लगभग 100 सीटों के आंकड़े पर पहुंचती हैं. इसके अलावा, भाजपा विरोधी मुख्यमंत्रियों की फेहरिस्त में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी हैं, लिहाजा दिल्ली की 7 लोकसभा सीटें भी इस आंकड़े को बढ़ाती हैं. यही वजह है कि दिल्ली पहुंचे इन मुख्यमंत्रियों की बैठक पर सबकी नजरें लगी हुई हैं.

ओडिशा के मुख्यमंत्री नहीं आएंगे बैठक में
ओडिशा में भी 2019 में ही विधानसभा चुनाव होने हैं. जाहिर है भाजपा पिछले कुछ समय से यहां अति-सक्रिय अवस्था में है. वहीं एक दशक से भी ज्यादा से सत्तासीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की सरकार इस कारण ‘मुश्किल’ में है. यही वजह है कि सीएम नवीन पटनायक 17 जून को नई दिल्ली में होने जा रही नीति आयोग के संचालन निकाय की चौथी बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे. मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने यहां बताया कि पटनायक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे. हालांकि, महानदी जल विवाद और विशेष श्रेणी के दर्जे की मांग जैसे राज्य के मुख्य मुद्दों को वित्त मंत्री एस. बी. बेहरा उठाएंगे. बेहरा ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम महानदी विवाद समेत कई मुद्दों को उठाएंगे. महानदी के प्रवाह पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए केंद्र को हस्तक्षेप करना चाहिए.’