कसान: मेघालय में नौ-सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के गोताखोरों ने कोयला खदान में फंसे खनिकों की तलाश और बचाव कार्य सोमवार को भी जारी है. 370 फुट गहरी खदान में 18 दिन से फंसे 15 मजदूरों को बचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है. प्रदेश के इस दूरवर्ती गांव में जयंतिया हिल्स इलाके की एक अवैध कोयला खदान में ये मजदूर 19 दिनों से फंसे हुए हैं. एक तरफ राहत बचाव कार्य जारी है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं ने शिलांग स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में कोनराड सांगमा की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ सांकेतिक प्रदर्शन कर फंसे खनिकों के बचाव कार्य में ढीला रवैया अपनाने का आरोप लगाया. Also Read - Burevi Cyclone Latest News: चक्रवाती तूफान का संकट, दो राज्‍यों के इन तटीय शहरों में NDRF की टीमें तैनात

मेघालय खदान हादसा: 18 दिन बाद भी मजदूरों का सुराग नहीं, नेवी व NDRF के गोताखोर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे Also Read - UP Vidhan Parishad Election: यूपी विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुए चुनाव में 55.47% मतदान

पानी निकालने के लिए मदद
बचाव अभियान दल के प्रवक्ता आर सुसगनी ने रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि  कहा, “भारतीय नौ-सेना के गोताखोर (डाइवर) कोयला खदान के मुख्य शाफ्ट तक पहुंच गए हैं.” उन्होंने कहा कि नौ-सेना ने ईस्ट जैंतिया हिल्स जिले के अधिकारियों से 30 मीटर के खड्ढे से पानी निकालने के लिए मदद मांगी है ताकि गोताखोर अपना काम दोबारा शुरू कर सकें. प्रवक्ता ने कहा कि ओडिशा अग्निशमन सेवा का दस्ता भी कम से कम तीन खुली खदानों से पानी निकालने के काम में जुटा हुआ है. यह 370 फीट की कोयला खदान के पास हैं, जहां 15 खनिक फंसे हुए हैं. सुसगनी ने कहा, “हम गोताखोरों के लिए यह सभी सुरक्षा उपाय कर रहे हैं.” Also Read - नौसेना की बढ़ी ताकत, Brahmos मिसाइल के नौसैन्य संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण

उन्होंने कहा कि NDRF बचाव कार्य में शामिल अन्य एजेंसियों को सभी प्रकार की मदद प्रदान कर रहा है. NDRF भारतीय नौ-सेना को सभी लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन संबंधी मदद प्रदान कर रहा है. भारतीय नौ-सेना के 14 सदस्य, NDRF के 72 बचावकर्मी, ओडिशा अग्निशमन दस्ता के 21 कर्मी, कोल इंडिया लिमिटेड के 35 अधिकारियों समेत 200 बचावकर्मी अभियान में जुटे हुए हैं. बचाव अभियान में मेघालय के प्रदेश आपदा मोचन बल की टीम को भी लगाया गया है.

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समन्वय की कमी
कोल इंडिया लिमिटेड के महाप्रबंधक (पूर्वोत्तर कोयला क्षेत्र) जे. बोराह ने कहा कि 500 गैलन प्रति मिनट पानी निकालने वाला एक सबमर्सिबल पंप इलाके में पहुंचा दिया गया है. बोराह ने कहा, “घटनास्थल पर दो और पंप भेजे गए हैं. इसके अलावा दो अन्य पंप और पाइप व अन्य सामान जो जैंतिया या शिलांग में उपलब्ध नहीं हैं, कल भेजे जाएंगे.” खनन विशेषज्ञ और अवार्ड विजेता बचावकर्मी जसवंत सिंह गिल ने प्रदेश सरकार और बचाव एजेंसी के बीच समन्वय की कमी होने पर दुख जताया.

नींद में सोई थी सरकार 
उन्होंने कहा, “प्रदेश सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय का अभाव होने के कारण बचाव कार्य काफी धीमी रफ्तार से से चल रहा है.” कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में प्रदर्शन करते हुए महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जोपलिन स्कॉट शायला ने कोनराड संगमा सरकार पर बचाव कार्य में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया. शायला ने कहा, “सरकार नींद में सोई थी. बचाव कार्य की धीमी गति पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा खेद जताए जाने के बाद सरकार जगी है.”(इनपुट भाषा)

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