चुनाव आयोग ने गुरुवार को पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा की. त्रिपुरा में 18 फरवरी को और मेघालय और नगालैंड में 27 फरवरी को चुनाव होंगे. तीनों राज्यों में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई. इस बार इन तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी पूरी धमक के साथ चुनाव लड़ने जा रही है. खासतौर पर त्रिपुरा में बीजेपी ने पिछले कुछ समय में बड़ी मौजूदगी दर्ज कराई है. कांग्रेस को दूसरे नंबर पर धकेलकर वह वाम दलों को चुनौती दे रही है. Also Read - काशी: पीएम मोदी ने किया 'देव दीपावली' का आगाज: विपक्ष पर साधा निशाना, 'कुछ लोगों के लिये विरासत का मतलब परिवार से है'

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मेघालय:

सूबे में कांग्रेस की सरकार है. मौजूदा विधानसभा में वहां 60 में से 24 जगहों पर कांग्रेस के विधायक है तो बीजेपी के केवल 2 विधायक है. हालांकि, बीजेपी ने इस बार कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंकने का दावा किया है. बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने कुछ दिनों पहले राज्य में एक चुनावी रैली को संबोधित किया था और विश्वास जताया था कि वह मुकुल संगमा की अगुवाई वाली सूबे की सरकार को सत्ता से बेदखल करेंगे. हाल में मोदी सरकार ने राज्य में धार्मिक और अध्यात्मिक गलियारा विकसित करने के लिए 70 करोड़ रुपए के टूरिज्म पैकेज की घोषणा की है जिसके सहारे वह सरकार बनाने के सपने देख रहे है.

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वैसे मेघालय में बीजेपी की राह आसान नहीं है क्योंकि वहा ईसाईयों की आबादी ज्यादा हैं. बीजेपी की छवि एक कट्टर हिंदुत्व वाली पार्टी की है. यहां मतदाताओं को समझा पाना बीजेपी के लिए कठिन साबित होगा.

त्रिपुरा:

त्रिपुरा, लेफ्ट का मजबूत गढ़ है. यहां पिछले 5 विधानसभा चुनावों में लेफ्ट ही जीतते आई है. माणिक सरकार 1998 से लगातार राज्य के मुख्यमंत्री हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में क्लिन स्‍वीप करते हुए वाम दलों ने 60 में से 50 सीटें अपने नाम कर ली थीं. कांग्रेस को 10 सीटें मिली थीं. मगर 2016 में पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव में कांग्रेस और वामदलों के गंठबंधन से नाराज कांग्रेस के 6 विधायक पहले टीएमसी में फिर बीजेपी में शामिल हो थे.

2013 के चुनाव में बीजेपी ने 50 उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिनमें से 49 की जमानत जब्त हो गई थी. मगर 2015 के बाद से लगातार बीजेपी का ग्राफ बढ़ा है. इसी से बीजेपी के अन्दर उत्साह है और उन्हें लगता है कि वह लेफ्ट को सूबे की सत्ता से बेदखल कर सकती है. बताया जा रहा है कि पीएम मोदी वहां 2 रैली कर सकते हैं.

नागालैंड:

नगालैंड में टी. आर. जेलियांग के नेतृत्व वाली नगा पीपुल्स फ्रंट की सरकार है. 16, 579 वर्ग किलोमीटर में फैले नगालैंड के 11 जिलों की 60 विधानसभा सीटे हैं. राज्य की साक्षरता दर मेघालय के मुकाबले अधिक है, राज्य की साक्षरता दर 79.55 फीसदी है. राज्य की राजनीति में बीजेपी, कांग्रेस और रांकपा मुख्य दल है, जबकि एनपीएफ राज्य में अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है। इसके अलावा जनता दल (युनाइटेड) और राजद भी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमाते रहे हैं.

सूबे में पिछले साल जुलाई में राज्यपाल ने शुरहोजेली लीजित्सु की सरकार को बर्खास्त कर दिया, जिसके बाद नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के वरिष्ठ नेता टी. आर. जेलियांग ने राज्य के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. उन्हें बीजेपी का समर्थन हासिल हुआ था. राज्य में हुई इस सियासी उठापटक के बाद भाजपा के लिए नागालैंड में मौका बन सकता है.