नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी प्रमुख अमित शाह पर पलटवार करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी गठबंधन तोड़ने के लिए जिम्मेदार नहीं थी. रविवार को महबूबा मुफ्ती ने एक के बाद एक ट्वीट कर बीजेपी को आड़े हाथों लिया. उन्होंने भगवा पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी सॉफ्ट एप्रोच की बात कहकर अपने ही नैरेटिव से भटक गई है. उन्होंने कहा कि हर फैसले में बीजेपी सरकार के साथ थी.

सॉफ्ट एप्रोच पर बीजेपी थी साथ

पूर्व सीएम ने कहा कि हमारे भूतपूर्व सहयोगी ने हमारे उपर कई आरोप लगाए हैं. एजेंडा ऑफ एलायंस को लेकर हमारी प्रतिबद्धता के शिल्पकार राम माधव थे और इसे राजनाथ जी का समर्थन हासिल था. ये देखना दुखद है कि वो (बीजेपी) इसे सॉफ्ट एप्रोच का नाम देकर अपनी ही पहल को अस्वीकार कर रही है.

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महबूबा मुफ्ती ने 6 ट्वीट कर बीजेपी नेताओं के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया है जिसमें बीजेपी ने उन्हें गठबंधन तोड़ने का जिम्मेदार ठहराया गया था. 19 जून को बीजेपी ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए पीडीपी से अलग होने का फैसला लिया था जिसके बाद सरकार गिर गई और राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया.

एक ट्वीट में महबूबा ने लिखा, धारा 370 को विशेष दर्जा, पाकिस्तान के साथ बातचीत और हुर्रियत एजेंडा ऑफ एलायंस का हिस्सा थे. बातचीत को बढ़ावा देना, पत्थरबाजों के खिलाफ केस वापस लेना और एकतरफा सीजफायर जमीनी स्तर पर हालात सुधारने के लिए जरूरी थे. इस पर बीजेपी भी पूरी तरह सरकार के साथ थी. 

महबूबा ने उठाए कई मुद्दे

पूर्व बीजेपी मंत्री चौधरी लाल सिंह ने महबूबा को अलगाववादी समर्थक बताया था और कहा था कि उन्होंने अपना करियर ही शहीद सैनिकों के परिजनों के घर जाकर आंसू बहाने से शुरू किया था. इन आरोपों पर महबूबा ने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने के लिए सॉफ्ट एप्रोच बहुत जरूरी था और खुद बीजेपी ने स्वीकार किया था.

लाल सिंह के इस आरोप पर कि जम्मू कश्मीर में इलाके के हिसाब से भेदभाव किया गया, इस पर महबूबा ने कहा कि जम्मू और लद्दाख में ज्यादा काम 2014 की बाढ़ और कई घटनाओं की वजह से नहीं हो पाया.


उन्होंने रसाना (कठुआ) रेप और मर्डर केस का भी जिक्र करते हुए कहा कि मेरे प्रयासों की वजह से ही गुज्जर और बकरवाल समुदाय के सुरक्षा इंतजाम किए गए और आरोपी के समर्थक मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी की गई. मेरी कोशिशों से ही ये केस सीबीआई को ट्रांसफर नहीं हो किया गया.