जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) को एक साल से भी अधिक समय तक नजरबंद रखने के बाद मंगलवार देर शाम को रिहा कर दिया गया. महबूबा मुफ्ती को पिछले साल 4 अगस्त को नजरबंद किया गया था. रिहाई के फौरन बाद ही PDP चीफ महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने एक बार फिर संघर्ष का ऐलान किया और केंद्र के फैसले को लेकर जमकर हमला बोला. महबूबा को जन सुरक्षा अधिनियम यानी PSA के तहत हिरासत में लिया गया था. Also Read - महबूबा ने तिरंगे का अपमान किया, अनुच्छेद 370 दोबारा लागू नहीं होगा: कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद

महबूबा मुफ्ती ने एक ऑडियो संदेश जारी कर आर्टिकल 370 (Article 370) के प्रावधानों को हटाए जाने को काला फैसला करार दिया और कहा कि कश्मीर का संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने अपने टि्वटर पर पोस्ट किये गए ऑडियो संदेश में कहा, ‘मैं आज एक साल से भी ज्यादा समय के बाद रिहा हुई हूं. 5 अगस्त 2019 के उस काले दिन का काला फैसला मेरे दिल और रूह पर हर पल वार करता रहा. मुझे यकीन है कि ऐसी ही स्थिति जम्मू-कश्मीर के लोगों की रही होगी. कोई भी उस दिन की बेइज्जती को भूल नहीं सकता.’

महबूबा मुफ्ती ने केंद्र पर निशाना साधते हुए आगे कहा, ‘दिल्ली दरबार ने गैर कानूनी, गैर लोकतांत्रिक तरीके से हमसे छीन लिया, उसे वापस लेना होगा. साथ ही कश्मीर के मसले को हल करने के लिए जद्दोजहद जारी रखनी होगी. इसके लिए हजारों लोगों ने अपनी जानें न्योछावर की. यह रास्ता आसान नहीं है, मुझे यकीन है कि हौसले से यह दुश्वार रास्ता भी तय होगा. महबूबा ने इसके अलावा केंद्र के सामने मांग रखी कि जम्मू कश्मीर के जितने भी लोग देश की जेलों में बंद हैं, उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए.’

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में महबूबा मुफ्ती को हिरासत में रखने से जुड़े मामले पर अगली सुनवाई होने से महज दो दिन पहले यह कदम उठाया गया है. उपायुक्त ने आदेश दिया कि तत्काल प्रभाव से महबूबा से पीएसए हटाया जाए. उनकी हिरासत इस साल 31 जुलाई को तीन महीने के लिए बढ़ा दी गयी थी. महबूबा (60) को पिछले साल पांच अगस्त को पहले एहतियाती हिरासत में रखा गया था और बाद में छह फरवरी को उन पर कठोर पीएसए कानून लगा दिया गया. उन्हें सात अप्रैल को उनके सरकारी निवास में ले जाया गया जिसे प्रशासन ने पहले उप-जेल घोषित किया था.

उनकी बेटी इल्तिजा ने खुशी प्रकट करते हुए कहा कि उनकी मां आखिरकार हिरासत से मुक्त कर दी गयीं. इल्तिजा ने हिरासत को ‘अवैध, गैर कानूनी’ बताया. उन्होंने कहा, ‘मैं अब आशा करती हूं कि केंद्रशासित प्रदेश और उसके बाहर विभिन्न जेलों में साल भर से रखे गए युवा भी शीघ्र ही रिहा किए जाएंगे.’

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, ‘मुझे यह सुनकर खुशी हुई कि महबूबा मुफ्ती साहिबा को एक साल से अधिक समय बाद हिरासत से रिहा कर दिया गया. उनकी निरंतर हिरासत हास्यास्पद और लोकतंत्र के मूल तत्वों के विरूद्ध थी. बाहर आने पर महबूबा का स्वागत.’ वहीं, माकपा नेता मोहम्मद तारिगामी ने कहा कि मुफ्ती की रिहाई स्वागत योग्य राहत है, लेकिन प्रशासन को पांच अगस्त से पूर्व हिरासत में लिए गए सभी अन्य बंदियों के बारे में भी विचार करना चाहिए.