नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने सोमवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक को एक पत्र लिख कर जेएनयू की पीएचडी छात्रा और जम्मू-कश्मीर की राजनेता शहला राशिद के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने को लेकर तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने की मांग की. उन्होंने पत्र में लिखा कि शहला राशिद हिंसा भड़काने और सेना की छवि खराब करने के इरादे से फेक न्यूज का प्रसार कर रही हैं. वकील की ओर से शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए पुलिस ने कहा कि वह राशिद के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से पहले मसले की तहकीकात कर रही है.

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से ताल्लुक रखने वालीं शहला राशिद 2015-16 के दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रसंघ की उपाध्यक्ष रही हैं और वह जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नामक राजनीतिक दल से जुड़ी हैं. अधिवक्ता ने अपने पत्र में राशिद द्वारा उनके ट्विटर हैंडल पर रविवार को पोस्ट किए गए कुछ ट्वीट का जिक्र किया जिसमें उन्होंने लिखा, “सशस्त्र बलों के जवान रात में घर में घुस कर लड़कों को पकड़ रहे हैं, घरों में तोड़फोड़ मचा रहे हैं और जानबूझकर अनाज फर्श पर बिखेर रहे हैं और चावल में तेल मिला रहे हैं.”

राशिद ने यह भी दावा किया कि उसे यह जानकारी कश्मीर के लोगों से मिली. राशिद ने ट्वीट में कहा, “शोपियां में चार लोगों को सैन्य शिविर में बुलाकर उनसे पूछताछ (प्रताड़ित) की गई. उनके पास एक मिक (माइक्रोफोन) रख दिया गया ताकि उनकी चीख पूरे इलाके में सुनाई दे और इलाके को आतंकित किया जा सके. इससे पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा हो गया है.”

श्रीवास्तव ने कहा कि आरोपी द्वारा लगाए गए आरोप बिल्कुल झूठे, निराधार और मनगढ़त हैं. उन्होंने कहा, “यह तथ्य से साफ है कि उन्होंने इसके लिए प्रताड़ित करने की आवाज की कोई रिकॉर्डिग, उसकी तारीख, समय या इस संबंध में कोई विशिष्ट सूचना पेश नहीं की है.” अधिवक्ता ने कहा कि राशिद ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153,153-ए, 504 और 505 के तहत वर्गो के बीच दुश्मनी बढ़ाने का अपराध किया है.