सड़क हादसे में याददाश्त खो चुका सेना का "मृत जवान" सात साल बाद घर लौटा

काफी दिनों तक तलाश करने के बाद जब धर्मवीर का कोई सुराग नहीं मिला तो सेना ने 26 सितम्बर 2012 को उसे मृत घोषित कर उसकी पत्नी को नाम प्रतिमाह आठ हजार रूपये की पेंशन शुरू कर दी। परिवार भी धर्मवीर को मृत मान चुका था।

Written by: Komal Badodekar
Published: June 16, 2016, 2:53 PM IST

हमने फिल्मों और कहानियों में कई ऐसे किस्से सुने हैं जिनमें अक्सर किसी व्यक्ति की हादसे में याददाश्त चली जाती है फिर दोबारा हादसा होने पर याददाश्त वापस भी आ जाती है लेकिन जब इसी तरह के किस्से किसी व्यक्ति के जीवन में सच में घटे तो आप सुनकर हैरान रह जाएंगे। कुछ ऐसा ही हादसा भारतीय सेना के जवान धर्मवीर यादव के साथ असल ज़िन्दगी में हुआ।

भारतीय सेना की 66 आर्म्ड रेजिमेंट के जवान धर्मवीर यादव ने वर्ष 2009 में एक सड़क हादसे में अपनी याददाश्त खो दी थी लेकिन पिछले दिनों हरिद्वार में उनके साथ फिर एक सड़क हादसा हुआ। जिसके बाद उनकी याददाश्त वापस आ गई। यह भी पढ़ें: सेना का वीर जवान 6 गोली लगने के बाद भी पाक आर्मी को मार भगाया, अकेले ही फहरा दिया तिरंगा

धर्मवीर के पिता और सेना के सेवानिवृत्त सूबेदार कैलाश यादव ने बताया कि मेरा पुत्र धर्मवीर अप्रैल 1994 में सेना में 66 आर्म्ड रेजिमेंट में नियुक्त हुआ था। देहरादून में नियुक्ति के दौरान 29 नवम्बर 2009 को ड्यूटी के समय उसकी लाल बत्ती वाली कार अनियंत्रित होकर एक खड्डे में जा गिरी। उस समय धर्मवीर कार में अकेला ही था।

प्रतिकात्मक फोटो

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उन्होंने बताया कि हादसे के तुरंत बाद मीडिया और पुलिस मौके पर पहुंचे लेकिन कार पर लाल बत्ती होने के कारण धर्मवीर को लोगों से दूर रखने के लिए एकांत में बैठा दिया गया था। धर्मवीर के पिता ने आगे चर्चा करते हुए बताया कि सिर में चोट लगने से धर्मवीर की याददाश्त चली गई थी और वह चुपचाप वहां से रवाना हो गया था।इसके बाद उसे काफी दिनों तक तलाश किया गया लेकिन उसका पता नहीं लगने पर सेना ने 26 सितम्बर 2012 को उसे मृत घोषित कर उसकी पत्नी के नाम प्रतिमाह आठ हजार रूपये की पेंशन शुरू कर दी। परिवार भी धर्मवीर को मृत मान चुका था।

उसकी दो बेटियां हैं। कुछ दिन बाद सब कुछ सामान्य हो गया। इस बीच, धर्मवीर हरिद्वार पंहुच गया। करीब एक सप्ताह पहले हरिद्वार में एक मोटरसाइकिल ने उसे टक्कर मार दी और उसे सिर में चोट लग गई। चोट लगने के बाद धर्मवीर की याददाश्त लौट आई और खुद को भिखारी जैसी हालत में पा कर वह दंग रह गया।

परिजन के अनुसार, धर्मवीर ने जब लोगों से बोलना चाहा तो उसकी अजीब हालत, भिखारी जैसा हुलिया और उसके पास से आ रही दुरगंध के चलते किसी ने उससे बात नहीं की। हालांकि एक व्यक्ति ने उसके हाथ में पांच सौ रूपये का नोट रखकर चले गया।

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धर्मवीर ने उन 500 रूपये से अपनी हजामत बनवायी, बाल कटवाये और पचास रूपये में पुराने कपडे खरीदे। फिर वह बस से सोमवार की रात को बहरोड, जयपुर दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित अपने गांव पहुंचा। बहरोड को बदले हालत में देखकर उसने ग्रामीणों से पूछा और पैदल ही अपने घर के लिए रवाना हो गया।

हृदय के ऑपरेशन के बाद आराम कर रहे धर्मवीर के पिता ने बताया कि रात को जब घर पर पंहुच कर धर्मवीर ने दरवाजा खटखटाया तो उन्होंने उससे पूछा कि वह कौन है। दरवाजा खोलने पर सामने धर्मवीर था। उसे देख कर और उससे बातें कर पिता कैलाश को और उनके परिवार वालों को भरोसा ही नहीं हुआ।

सात साल पहले कथित तौर पर मर चुके धर्मवीर के लौटने की खबर सुन कर लोगों को भी विश्वास नहीं हो रहा। लेकिन अब उससे मिलने और उसे देखने आने वालों का तांता लग चुका है। कैलाश ने कहा कि उन्होंने सेना की 66 आर्म्ड रेजिमेंट को धर्मवीर के जिंदा होने और घर आने की सूचना दे दी है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

इस बीच, जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष आर पी यादव ने बताया कि 66 आर्म्ड रेजिमेंट के मृत घोषित किए जा चुके जवान धर्मवीर यादव के जीवित घर लौट आने के बारे में रेजिमेंट के कमान अधिकारी को सूचना दे दी गई है। उन्होंने कहा कि धर्मवीर को उसकी मेडिकल जांच रिपोर्ट आने के बाद कमान को सौंपा जायेगा। फिलहाल धर्मवीर के स्वास्थ्य की जांच की प्रक्रिया चल रही है।

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