नई दिल्ली: कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) लगवाने से पुरुषों और महिलाओं में बाँझपन (Infertile) की शिकायत हो सकती है, ऐसी कई ख़बरें और बातें सोशल मीडिया (Social Media) पर हैं. अब इसका सच भी सामने आ गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 रोधी टीका लगवाने से पुरुषों और महिलाओं के बांझपन का शिकार होने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और टीके सुरक्षित व प्रभावी हैं.Also Read - देश में अब तक 46.72 करोड़ से ज्यादा कोविड टीके की खुराक दी गई: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में मीडिया में आईं कुछ खबरों में नर्सों सहित स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम मोर्चे के कर्मियों के एक वर्ग में विभिन्न अंधविश्वासों और मिथकों की व्यापकता को उजागर किया गया है. पोलियो और खसरा-रूबेला के खिलाफ टीकाकरण अभियान के दौरान भी इस तरह की गलत सूचना और अफवाहें फैलाई गईं थीं. Also Read - दिल्ली में एक करोड़ से अधिक टीके की खुराक दी गई: CM अरविंद केजरीवाल

मंत्रालय ने कहा कि उसने वेबसाइट (Website) पर पोस्ट किए गए एफएक्यू (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) में स्पष्ट किया है कि उपलब्ध टीकों में से कोई भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करता है, क्योंकि सभी टीकों और उनके घटकों का परीक्षण पहले जानवरों और बाद में मनुष्यों पर किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका कोई दुष्प्रभाव तो नहीं. बयान में कहा गया है कि टीकों को उनकी सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित होने के बाद ही उपयोग के लिए अधिकृत किया जाता है. Also Read - दिल्ली में अब तक करीब 98 लाख कोरोना की खुराकें दी गईं, जानें क्या है वैक्सीनेशन की स्थिति

बयान के अनुसार, ‘इसके अलावा, भारत सरकार ने कोविड-19 टीकाकरण के कारण बांझपन के बारे में प्रचलित मिथक को रोकने के लिए स्पष्ट किया है कि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि कोविड-19 टीकाकरण पुरुषों और महिलाओं में बांझपन का कारण बन सकता है. टीके सुरक्षित और प्रभावी पाए गए हैं.’ कोविड ​​-19 टीकाकरण को लेकर विशेषज्ञों के राष्ट्रीय समूह (एनईजीवीएसी) ने स्तनपान (Breast Feeding) कराने वाली सभी महिलाओं के लिए कोविड ​​-19 टीकाकरण (Corona Vaccine) की सिफारिश की है. समूह ने इसे सुरक्षित बताते हुए कहा है कि टीकाकरण से पहले या बाद में स्तनपान को रोकने की कोई आवश्यकता नहीं है.