नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला का बड़ा बयान सामने आया है. एक कार्यक्रम में सत्य नडेला ने कहा- जो कुछ भी हो रहा है यह काफी दुखद है.. यह काफी बुरा है… मैं एक ऐसे बांग्लादेशी अप्रवासी को देखना पसंद करूंगा जो भारत में आता है और इंफोसिस का अगला सीईओ बनता है. BuzzfeedNews के एडिटर-इन-चीफ बेन स्मिथ से बात करते हुए सत्य नडेला ने यह बात कही.

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर नडेला ने कहा, हर देश को अपनी सीमाओं को परिभाषित करना चाहिए. राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना और उसके अनुसार आप्रवासी पॉलिसी तैयार करना चाहिए. और लोकतंत्रों में, यह कुछ ऐसा है कि जनता और उनकी सरकारें बहस कर उन सीमाओं को परिभाषित करेंगी.

बता दें कि देश में कई जगहों पर नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. वहीं नागरिकता कानून पर देश के कई इलाकों में हिंसा भी देखने को मिली. इस बीच केन्द्र सरकार की घोषणा के बाद संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) 10 जनवरी से प्रभावी हुआ. जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी. अधिसूचना में कहा गया है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का 47) की धारा 1 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 10 जनवरी 2020 को उक्त अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होने की तारीख के रूप में तय करती है. संशोधित नागरिकता कानून को 11 दिसंबर को संसद द्वारा पारित किया गया था.

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए प्रवासियों को नए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत नागरिकता देने के लिए सूचीबद्ध करने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य बनने की तैयारी में है. यह कवायद उन लोगों की भी पहचान करेगी जो राज्य में अवैध रूप से रह रहे हैं. अतरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी के अनुसार, सभी 75 जिलों के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन प्रवासियों की पहचान करें, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर दशकों से यहां बिना नागरिकता के रह रहे हैं. अधिकारी ने कहा कि हालांकि, उत्तर प्रदेश में रहने वाले अफगानिस्तान के लोगों की संख्या कम से कम होगी, अनुमान है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से पर्याप्त संख्या ऐसे लोगों की हो सकती है, जो अपने देशों में सताए जाने के बाद यहां आकर बस गए थे.