नई दिल्ली: भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में अपने सैन्य गतिरोध को लेकर शुक्रवार को राजनयिक वार्ता की. साथ ही, दोनों देश राजनयिक वार्ता के जरिये मतभेदों को दूर करने पर सहमत हुए. दोनों देशों ने एक दूसरे की संवेदनशीलता, चिंता एवं आकांक्षाओं का सम्मान करने तथा इन्हें विवाद नहीं बनने देने पर भी सहमति जतायी. Also Read - भारत को मिला अमेरिका का समर्थन, माइक पॉम्पिओ बोले- चीन को भारत ने दिया सही जवाब

वीडियो कांफ्रेंस के जरिये विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया), नवीन श्रीवास्तव और चीनी विदेश मंत्रालय में महानिदेशक वु जिआनघाओ के बीच वार्ता हुई. सैन्य गतिरोध का प्रत्यक्ष रूप से जिक्र किये बगैर विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने मौजूदा घटनाक्रमों सहित द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की समीक्षा की. Also Read - पाकिस्तान ने कहा- कुलभूषण जाधव ने अपील दायर करने से मना किया, भारत ने दावे को बताया ‘स्वांग’

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘इस संदर्भ में उन्होंने दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी उस आमसहमति को याद किया कि भारत और चीन के बीच शांतिपूर्ण, स्थिर और संतुलित संबंध मौजूदा वैश्विक स्थिति में स्थिरता के लिये एक सकारात्मक चीज होगी.’’ Also Read - कांग्रेस का सवाल- भारतीय सेना LAC पर हमारी ही सरजमी से क्यों हट रही है पीछे, क्या पीएम मोदी के शब्दों के मायने नहीं?

बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष दोनों देशों के नेतृत्वों द्वारा मुहैया किये गये दिशानिर्देशों के मुताबिक मतभेदों को दूर करने पर सहमत हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई दो अनौपचारिक शिखर बैठकों में लिये गये फैसलों के संदर्भ में यह कहा गया.

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों के नेतृत्वों के मार्गदर्शन के तहत दोनों देशों को अपने मतभेदों को शांतिपूर्ण चर्चा के जरिये दूर करना चाहिए.’’ उसने कहा कि इन मतभेदों को दूर करने वाली चर्चा के दौरान दोनों पक्ष एक दूसरे की संवेदनशीलता, चिंताओं और आकांक्षाओं का सम्मान करेंगे और इन्हें विवाद नहीं बनने देंगे. पूर्वी लद्दाख के कम से कम चार क्षेत्रों में पिछले एक महीने से भारत और चीन के सैनिकों के बीच सैन्य गतिरोध चल रहा है.

(इनपुट भाषा)