नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत ने सभी भौगोलिक क्षेत्रों में देशों से सम्पर्क करके संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के मुद्दे पर अपना दृष्टिकोण उनके साथ साझा किया है. मंत्रालय ने साथ ही कहा कि ये भारत के आंतरिक मामले हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि मंत्रालय द्वारा दोतरफा रणनीति अपनाई गई और यहां स्थित कई राजदूतों और उच्चायुक्तों तक पहुंच बनाने के साथ ही विदेशों में भारतीय राजदूतों ने विभिन्न देशों की सरकारों के साथ सम्पर्क किया.’’ Also Read - Corona Spike in India: COVID19 ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़े, 3,32,730 नए केस आए, 24 घंटे में 2263 मौतें

उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमने सभी भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित देशों तक पहुँच बनायी. हमने अपने मिशनों को पत्र लिखे. हमने उन्हें सीएए और एनआरसी पर हमारे दृष्टिकोण को वहां की सरकारों के साथ साझा करने के लिए कहा.’’ कुमार ने कहा कि देशों तक भारत की पहुंच के तहत सीएए और एनआरसी पर तीन…चार बिंदुओं पर जोर दिया गया. Also Read - Realme 8 5G Price in India: मात्र 14,999 रुपये में मिल रहा है ये 5जी स्मार्टफोन, जानिए क्या हैं इसकी धमाकेदार फीचर्स

उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस बात पर जोर दिया कि यह भारत का आंतरिक मामला है. हमने उन्हें (मिशन) यह बताने के लिए भी कहा कि यह कानून (सीएए) उन प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया में तेजी लाता है जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से पहले से ही भारत में हैं.’’ Also Read - भारत में गैर-मुनाफे वाली कीमत पर Corona Vaccine देने को तैयार Pfizer, मिल सकता है सस्ता टीका

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के अनुसार हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के सदस्य जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से वहां धार्मिक उत्पीड़न के चलते 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आये हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता मिलेगी. कुमार ने कहा कि भारतीय पक्ष ने देशों को यह भी बताया कि सीएए अन्य समुदायों के लिए नागरिकता प्राप्त करने के लिए उपलब्ध मौजूदा रास्तों को प्रभावित नहीं करता है. कुमार ने कहा कि यह किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं है.

उन्होंने कहा कि यह भी बताया गया कि यह कानून किसी भी तरह से संविधान के बुनियादी ढांचे को नहीं बदलता जैसा कुछ विदेशी प्रेस ने इसे पेश किया है. कुमार ने कहा कि भारतीय राजदूतों और महावाणिज्य दूतों से कहा गया था कि वे सरकार में न केवल वार्ताकारों तक बल्कि मीडिया तक भी पहुंच बनायें. उन्होंने कहा, ‘‘कई मौकों पर मंत्रालय यहां दिल्ली में बहुत ही सक्रिय कूटनीति अपनाता है लेकिन इस मामले में यह महसूस किया गया कि इसमें काफी कुछ स्पष्ट किया जाना है और किसी को सरकारों को जानकारी देनी चाहिये.’’

यह पूछे जाने पर कि भारतीय पक्ष ने एनआरसी को लेकर अन्य देशों को क्या जानकारी दी, कुमार ने कहा कि इस बात पर जोर दिया गया कि सीएए और एनआरसी अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और एकदूसरे से संबंधित नहीं हैं.

उन्होंने असम में एनआरसी का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हमने कहा है कि एनआरसी की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के आदेश पर चलाई गई, यह हमारा आंतरिक मामला है. हम जो कर रहे हैं वह उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित और उच्चतम न्यायालय के आदेश पर और उच्चतम न्यायालय की निगरानी में की गई.’’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हमें पूरे विश्व से जो प्रतिक्रियाएं मिलीं हैं, उन पर गौर करेंगे तो हमें लगता है कि कुछ देशों को छोड़कर ज्यादातर देशों ने स्वीकार किया है कि यह भारत का आंतरिक मामला है और यही उनकी प्रतिक्रियाओं और उनकी घोषणाओं में झलक रहा है.’’

जब उन खबरों के बारे में पूछा गया जिसमें कहा गया था कि कुछ देशों को सीएए के बारे में अवगत नहीं कराया गया, तो उन्होंने कहा कि वे खबरें ‘‘तथ्यात्मक रूप से गलत’’ थीं. एनआरसी पर बांग्लादेश की प्रतिक्रिया पर, उन्होंने कहा कि भारत ने बांग्लादेश की सरकार के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर पिछले महीने 2 + 2 संवाद के लिए अमेरिका में थे. उन्होंने वाशिंगटन में सीनेट की विदेश संबंध समिति के नेतृत्व के साथ सीएए पर भारत का नजरिया साझा किया था. सीएए को लेकर विरोध के चलते पिछले महीने भारत-जापान द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन स्थगित हो गया था. जापानी प्रधानमंत्री की यात्रा ऐसे दिन रद्द हुई जब एक दिन पहले बांग्लादेशी विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमेन और बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुज्जमां खान ने कानून लागू होने के बाद भारत की अपनी यात्रा रद्द कर दी थी.

(इनपुट भाषा)