नई दिल्ली: केंद्र में दोबारा सत्‍तारूढ़ होने के बाद बीजेपी की सरकार ने अपना वादा पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा दिया है. सरकार हेल्‍थ सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए 75 जिला अस्‍पतालों को मेडिकल कॉलेजों में बदलने जा रही है. करीब 325 करोड़ रुपए इस बड़े प्रोजेक्‍ट के लिए खर्च किए जाएंगे. सरकार के इस मिशन से देश के पिछड़े जिलों में अच्‍छी स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं उपलब्‍ध हो सकेंगी. फिलहाल इस प्रस्‍ताव को व्यय वित्त समिति के पास भेजा गया है. इसकी मंजूरी मिलते ही इसे कैबिनेट के पास भेजा जाएगा.

स्वास्थ्य के क्षेत्र में मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ाने संबंधी एक योजना के तीसरे चरण में स्वास्थ्य मंत्रालय ने 75 जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में तब्दील करने का प्रस्ताव रखा है. यह प्रस्ताव केंद्र प्रायोजित उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत जिला अस्पतालों या रेफरल अस्पतालों का उन्नयन कर नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जानी है. इस योजना में देश के पिछड़े जिलों को प्रमुखता दी जानी है. 75 जिला अस्पतालों का मेडिकल कॉलेजों के तौर पर उन्नयन करने में करीब 325 करोड़ रुपए की लागत आएगी.

प्रथम चरण में सरकार ने 58 जिला अस्पतालों को मेडिकल कालेज में बदलने की मंजूरी दी थी. दूसरे चरण में यह मंजूरी 24 अस्पतालों के लिए थी. इनमें से 39 अस्पताल काम शुरू कर चुके हैं. शेष में निर्माण कार्य जारी है.

इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, योजना के तीसरे चरण में 75 जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में तब्दील करने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए व्यय वित्त समिति (ईएफसी) के पास भेजा गया है. ईएफसी की मंजूरी के बाद इसे कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. उन्होंने कहा, इस बारे में कैबिनेट का एक नोट पहले ही तैयार किया जा चुका है.

मसौदा प्रस्ताव के अनुसार, 75 जिला अस्पतालों का मेडिकल कॉलेजों के तौर पर उन्नयन करने में करीब 325 करोड़ रुपए की लागत आएगी. अगर इस प्रस्ताव को अमली जामा पहनाया जाता है तो इससे बीजेपी एक और वादा पूरा होगा, जो पार्टी ने हाल ही में
संपन्न लोकसभा चुनाव में किया था.