नई दिल्लीः केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट रोकथाम कानून के अनेक प्रावधानों के तहत दर्ज मामलों की संख्या, जब्त किये गये स्टॉक आदि पर सभी राज्यों से रिपोर्ट मांगी है. कानून पांच दिसंबर को अधिसूचित किया गया था जिसमें ई-सिगरेटों के उत्पादन, आयात, निर्यात, बिक्री और विज्ञापन आदि पर रोकथाम के प्रावधान किए गए हैं और उल्लंघन करने पर जेल की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान है.

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर विभागों तथा संबंधित अधिकारियों को कानून के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी निर्देश जारी करने तथा पुलिस एवं अन्य विभागों की सहभागिता के साथ महीने भर तक अभियान चलाने को कहा है. सरकार ने 2019 साल सितंबर में ई-सिगरेटों पर प्रतिबंध के लिए अध्यादेश जारी किया था. नये कानून ने इस अध्यादेश की जगह ली.

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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक अक्टूबर को ई-सिगरेटों पर पाबंदी को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई करते हुए उस प्रावधान पर रोक लगा दी थी जिसमें स्टॉक को सरकारी परिसरों में जमा कराने की बात कही गयी थी. उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि ई-सिगरेट निर्माता और थोक विक्रेता अपने भंडार को अपने गोदाम में रख सकते हैं जहां कोई सरकारी अधिकारी उसकी जानकारी लेगा.

सूदन ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा, ‘‘मुझे आपसे अनुरोध करना है कि कानून के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी निर्देश जारी करें तथा पुलिस एवं अन्य विभागों की सहभागिता के साथ महीने भर लंबा अभियान भी चलाएं.’’