Assam, Mizoram Latest Update: गृह मंत्रालय (एमएचए) पूर्वोत्तर के दो राज्यों के बीच जारी सीमा विवाद के बीच स्थिति को लेकर असम और मिजोरम प्रशासन के साथ नियमित बातचीत कर रहा है. अधिकारियों ने शनिवार को यहां यह जानकारी दी. यह स्वीकार करते हुए कि स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में है, एमएचए अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की बटालियनें दोनों राज्यों के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 306 के साथ क्षेत्र में गश्त कर रही हैं, ताकि राज्य की नीतियों के बीच किसी भी तरह की झड़प को रोका जा सके.Also Read - PFI Ban: PFI का ट्विटर अकाउंट बैन, सरकार की शिकायत के बाद Twitter India ने की कार्रवाई | Watch Video

मंत्रालय ने हालांकि इस मामले में राज्यों द्वारा क्रॉस एफआईआर के मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी शनिवार को तनाव कम करने के लिए कदम बढ़ाए हैं. उन्होंने अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बारे में बोलते हुए कहा कि उन्हें किसी भी जांच में शामिल होने में बहुत खुशी होगी. Also Read - PFI Ban: टेरर कनेक्शन-देश विरोधी गतिविधियां, पीएफआई पर प्रतिबंध को सत्ता पक्ष ने ठहराया सही, कांग्रेस ने लगाया आरोप

हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि मामला एक तटस्थ एजेंसी को क्यों नहीं सौंपा जा रहा है, खासकर जब, घटना की जगह असम के संवैधानिक क्षेत्र के भीतर है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने मिजोरम समकक्ष जोरमथांगा को भी इस बारे में बता दिया है. मिजोरम पुलिस ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सरमा के खिलाफ सीमा पर हुई झड़पों के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज की है. सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर दोनों मुख्यमंत्रियों से कई बार बात की है और उनसे क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. Also Read - PFI Ban: आतंकी कनेक्शन को लेकर पीएफआई सहित 8 संगठनों पर बड़ी कार्रवाई, 5 साल के लिए लगाया गया प्रतिबंध

इससे पहले, मिजोरम के गृह विभाग के सचिव पी. लालबियाकसांगी ने भी गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (पूर्वोत्तर) पीयूष गोयल को पत्र लिखकर शिकायत की है कि असम द्वारा अंतर-राज्यीय सीमा के साथ धोलाई और हवाईथांग क्षेत्र में सशस्त्र पुलिस कर्मियों को जुटाया जा रहा है.

मीडिया रिपोटरें का हवाला देते हुए कि असम पुलिस कमांडो के लगभग चार प्लाटून को अतिरिक्त रूप से तैनात किया गया है. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से असम सरकार को इस तरह के सु²ढीकरण से बचने और उन टुकड़ियों को वापस खींचने के लिए उचित निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है.

इससे पहले, मिजोरम ने केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को पत्र लिखकर असम से बराक घाटी के निवासियों द्वारा कथित रूप से राज्य मशीनरी के समर्थन से लगाई गई आर्थिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने के लिए कहा है, लेकिन असम सरकार ने आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन किया है.

असम प्रशासन द्वारा कथित यात्रा प्रतिबंध के बारे में स्पष्ट करते हुए, सरमा ने शुक्रवार को कहा था कि राज्य सरकार की सलाह यात्रा पर अंकुश लगाने के लिए नहीं है. उन्होंने कहा, हमने अपने लोगों को मिजोरम जाने से पहले केवल सोचने की सलाह दी है, क्योंकि वहां के नागरिकों के हाथों में हथियार हैं और यह तब तक जारी रहेगा, जब तक मिजोरम सरकार उनके हथियार जब्त नहीं कर लेती.

एक राज्य द्वारा दूसरे के क्षेत्र में अतिक्रमण करने के आरोप के बीच, स्थिति 26 जुलाई की दोपहर को काफी बढ़ गई थी, जब मिजोरम के अंदर वैरेंगटे ऑटो स्टैंड पर, असम पुलिस के पांच जवान शहीद हो गए थे और एक नागरिक भी मारा गया था. इसके अलावा एक पुलिस अधीक्षक सहित अन्य 50 से अधिक घायल हुए थे. मिजोरम पुलिस द्वारा कथित तौर पर असम के अधिकारियों की एक टीम पर गोलियां चलाने से वह घायल हो गए थे.

झड़प के तुरंत बाद, शाह ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की और उन्हें तनाव कम करने की सलाह दी और उन्हें विवादित स्थल से अपने पुलिस कर्मियों को वापस लेने के लिए भी कहा.

बाद में, 28 जुलाई को, केंद्रीय गृह सचिव ने असम और मिजोरम के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दोनों राज्य कमान के तहत एनएच 306 के साथ अशांत सीमावर्ती क्षेत्रों में केंद्रीय पुलिस बल (सीआरपीएफ) की तैनाती के लिए सहमत हुए.

बैठक के दौरान दोनों राज्य सरकारों ने सीमा मुद्दे को सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करने के लिए पारस्परिक रूप से चर्चा जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की.

(इनपुट आईएएनएस)