नई दिल्ली: केद्र ने शुक्रवार रात दावा किया कि सेवा से संबंधित मामलों में कोई अंतिम राय बनाना कानून के विरुद्ध होगा, क्योंकि यह मुद्दा उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है. दिल्ली के उपराज्यपाल और आप सरकार के बीच खींचतान पर गृह मंत्रालय ने कहा कि सेवा से संबंधित मामलों में कोई भी अंतिम मत अपनाना कानून के खिलाफ होगा, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने उपराज्यपाल से कानून का पालन करने को कहा. गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने दिल्ली उपराज्यपाल को उच्चतम न्यायालय के आदेश (अधिकारों के विभाजन संबंधित) के किसी अंश की अनदेखी करने का सुझाव नहीं दिया.  इससे पहले मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार एवं उपराज्यपाल ने इस बारे में शीर्ष अदालत के आदेश का पालन करने से इंकार कर दिया है. Also Read - 5 अक्टूबर को दिन में 2 बजे विजय माल्या को कोर्टरूम लेकर आए सरकार: सुप्रीम कोर्ट

बैजल ने  सेवाएं दिल्ली विधानसभा के दायरे से बाहर
मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल ने  शुक्रवार को कहा कि ‘सेवाओं’ को दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र के बाहर बताने संबंधित गृह मंत्रालय की 2015 की एक अधिसूचना अभी तक वैध है. केजरीवाल को लिखे पत्र में बैजल ने कहा कि सेवाओं के मामले एवं अन्य मुद्दों पर और स्पष्टता तभी आएगी, जब उच्चतम न्यायालय की नियमित पीठ के समक्ष इस संबंध में लंबित अपीलों को अंतिम रूप से निस्तारित कर दिया जाता है.

विवाद का कारण सेवा विभाग
उपराज्यपाल के अधिकारों को सीमित करने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद दिल्ली सरकार एवं एलजी कार्यालय के बीच विवाद का कारण सेवा विभाग बना हुआ है. बैजल का यह बयान ऐसे समय में आया है जबकि शुक्रवार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कुछ समय पहले कहा था कि उपराज्यपाल ने सेवा विभाग का नियन्त्रण राज्य सरकार को सौंपने से मना कर दिया है.

गृह मंत्रालय की 2015 की एक अधिसूचना के बारे में ध्यान दिलाया
केजरीवाल को लिखे एक पत्र में बैजल ने गृह मंत्रालय की 2015 की एक अधिसूचना के बारे में ध्यान दिलाया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 239 और 239 एए के तहत ‘राष्ट्रपति निर्देश’ जारी होते हैं. इसमें कहा गया कि ‘सेवाएं’ दिल्ली विधानसभा के अधिकारक्षेत्र के बाहर हैं परिणामस्वरूप दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के पास ‘सेवाओं’ को लेकर कोई कार्यपालिका अधिकार नहीं हैं.
मद्रास हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय को एलजी की शक्तियों पर नोटिस जारी किए
चेन्नई स्थित मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को गृह मंत्रालय को पिछले साल केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल को दी गई शक्तियों को लेकर दिए गए उसके दो स्पष्टीकरणों की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर नोटिस जारी किया. पुडुचेरी के कांग्रेस विधायक के लक्ष्मीनारायणन ने पिछले साल 27 जनवरी और 16 जून को गृह मंत्रालय के स्पष्टीकरणों पर एक याचिका दायर की थी, जिस पर न्यायमूर्ति टी राजा ने यह आदेश जारी किया. गृह मंत्रालय ने स्पष्टीकरण दिया था कि केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल (एलजी) के पास एक राज्य के राज्यपाल से अधिक शक्तियां होती है और वह मंत्रिमंडल की सलाह के बिना काम कर सकते हैं. (इनपुट – एजेंसी)