पुरी: बारहवीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर को चक्रवात फोनी से मामूली नुकसान पहुंचा है. चक्रवात इस धार्मिक नगरी से होकर गुजरा था.
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक पीके महापात्र ने कहा, ”हां, मंदिर को मामूली नुकसान हुआ है, लेकिन मुख्य ढांचे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. हम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से मंदिर का निरीक्षण करने का आग्रह करेंगे.” मंदिर में खड़ा एक ‘कल्प वट’ (बरगद का बड़ा पेड़) भी चक्रवात के चलते टूट गया. श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति के लिए इस वृक्ष पर धागा बांधा करते थे.

पुरी जिले में कम से कम 21 लोगों की जान लेने वाले विनाशकारी चक्रवात का असर मंदिर के मुख्य प्रवेश बिंदु सिंह द्वार से देखा जा सकता है. सिंह द्वार को स्थानीय लोग ‘जय-विजय द्वार’ भी कहते हैं. इस द्वार पर भी फोनी का असर पड़ा है. इस द्वार पर जय और विजय की मूर्तियां थीं.

महापात्र ने कहा, जय की मूर्ति नष्ट हो गई है. विजय की मूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. चक्रवात जब पुरी से गुजरा तो तब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग मुख्य मंदिर में मरम्मत का कुछ कार्य कर रहा था. इसमें लोहे के करीब पांच हजार खंभे लगाए गए थे.

इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लोहे के अधिकतर खंभे गिर गए, कुछ मुड़ गए. मंदिर के पास शेर की एक बड़ी मूर्ति भी मामूली रूप से क्षतिग्रस्त हो गई. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर जगन्नाथ मंदिर पुलिस से किसी को भी शेर की क्षतिग्रस्त मूर्ति के पास न आने देने को कहा गया है.

इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि यद्यपि शनिवार को श्रद्धालुओं के प्रवेश पर कुछ समय के लिए पाबंदी रही, लेकिन रविवार को इसमें ढील दे दी गई.
मंदिर में खड़ा एक ‘कल्प वट’ (बरगद का बड़ा पेड़) भी चक्रवात के चलते टूट गया. श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति के लिए इस वृक्ष पर धागा बांधा करते थे.