नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दिसंबर 2021 तक अपने ‘गगनयान’ मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) को अंतरिक्ष (Space) में भेजने को लेकर जमकर तैयारी कर रहा है. इसको ध्यान में रखते हुए अंतरिक्ष यात्रियों के लिए मैसूर में रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला ने विशेष फूड और लिक्विड पैकेज तैयार किए हैं. Also Read - Corona Spike in India: COVID19 ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़े, 3,32,730 नए केस आए, 24 घंटे में 2263 मौतें

समाचार ऐजेंसी एएनआई के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खाने का विशेष मेनू तैयार किया गया है. इसमें एग रोल, वेज रोल, इडली, मूंग दाल का हलवा और वेज पुलाव शामिल हैं. मंत्रालय ने अंतरिक्ष यात्रियों को फूड हीटर के साथ लिक्विड पीने में मदद करने के लिए वाटर और जूस के लिए विशेष कंटेनरों की भी व्यवस्था भी की है. Also Read - Realme 8 5G Price in India: मात्र 14,999 रुपये में मिल रहा है ये 5जी स्मार्टफोन, जानिए क्या हैं इसकी धमाकेदार फीचर्स

इसरो के अनुसार, भारत दिसंबर 2021 तक आदमी को अंतरिक्ष में भेजने के अपने लक्ष्य को पूरा करेगा. बता दें कि चंद्रयान-2 मिशन के पूरी तरह सफल नहीं होने से पिछले साल पैदा हुई निराशा को पीछे छोड़ते हुए इसरो ने 2020 में चंद्रयान-3 के साथ चंद्रमा की सतह पर अपने लैंडर को उतारने और पहले सौर मिशन को भेजने का संकल्प लिया है. साल 2022 तक अंतरिक्ष में भारतीयों को भेजने के मकसद से इसरो ने देश के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को भेजने की योजना बनाई है. साल 2020 में इसरो ने एक मानवरहित अंतरिक्ष उड़ान के परीक्षण की भी योजना बनाई है. Also Read - भारत में गैर-मुनाफे वाली कीमत पर Corona Vaccine देने को तैयार Pfizer, मिल सकता है सस्ता टीका


गगनयान एक भारत का क्रू मेंम्बर वाला स्पेसक्राफ्ट होगा. इससे तीन अंतरिक्ष यात्रियों को कम से कम सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में ले जाने की उम्मीद है. इस परियोजना की घोषणा पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 2018 के स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान की थी. मिशन पर लगभग 10,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इसरो के अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने चार अंतरिक्ष यात्रियों की पहचान की है और उनका प्रशिक्षण 2020 में जनवरी के तीसरे सप्ताह से रूस में शुरू होगा.

इसरो प्रमुख के.सिवन ने बताया कि इस मिशन के लिए चार अंतरिक्षयात्रियों को चुना गया है और उनका प्रशिक्षण इस महीने के तीसरे सप्ताह से रूस में शुरू होगा. उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि चंद्रयान-3 और गगनयान से जुड़ा कार्य साथ-साथ चल रहा है. इसरो प्रमुख ने चेन्नई के उस इंजीनियर की भी तारीफ की जिसने चंद्रमा पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का पता लगाया था. उन्होंने कहा कि यह अंतरिक्ष एजेंसी की नीति थी कि वह दुर्घटनाग्रस्त मॉड्यूल की तस्वीर जारी नहीं करेंगे.