आइजोल: मिजोरम में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के पश्चात भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ‘किसी भी कीमत पर सत्ता हथियाने’’ के लिए खरीद-फरोख्त का सहारा ले सकती है और ऐसे हालात में निर्दलीय विधायकों को आसानी से लुभाए जाने की आशंका रहती है. भाजपा की राज्य इकाई ने, इस आरोप का कड़ाई से खंडन करते हुए कहा है कि उनका दल कभी भी खरीद-फरोख्त में संलग्न नहीं रहा और न ही ऐसा करने का उसकी कोई मंशा है. विदित हो कि 40 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए चुनाव 28 नवम्बर को होंगे. पूर्वोत्तर का यह एकमात्र राज्य है जहां कांग्रेस सत्तासीन है. Also Read - बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब इस तैयारी में विपक्षी महागठबंधन...

राज्य में सत्तारूढ़ दल ने जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) पर भी प्रहार किया. जेडपीएम सात संगठनों का समूह है एवं इसके 35 प्रत्याशी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस के प्रवक्ता लालियानचुहुंगा ने यहां कहा, ‘ भाजपा किसी भी कीमत पर सत्ता प्राप्त करना चाहती है और इस सौदेबाजी में निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए सर्वाधिक खतरा रहता है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि अगर भाजपा दो तीन सीटों को जीत लेती है तो वह पिछले दरवाजे से सत्ता में आने के लिए विधायकों को लुभाने में लग जायेगी, जैसा कि उसने मेघालय एवं नागालैंड में किया है. Also Read - GHMC Election 2020: हैदराबाद में बोले अमित शाह- जीएचएमसी चुनाव में जीत होने के बाद हैदराबाद बनेगा आईटी केंद्र, खत्म होगी निजाम संस्कृति

भाजपा प्रवक्ता लालरोजारा ने कहा कि खरीद-फरोख्त के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं और कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है. कांग्रेस भगवा दल की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास कर रही है. मिजोरम विधानसभा चुनाव में बुधवार को नाम वापसी के अंतिम दिन तीन उम्मीदवारों के चुनावी जंग से हटने के बाद अब 201 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं. राज्य के चुनाव विभाग के अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार तक 212 नामांकन पत्र प्राप्त हुए. इनमें मुख्यमंत्री लल थनहवला समेत आठ प्रत्याशी दो-दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं.अधिकारियों के मुताबिक जांच के दौरान सभी नामांकन पत्र वैध पाये गये. तीन उम्मीदवारों ने बुधवार को अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली. मिजोरम में 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए 28 नवंबर को मतदान होगा. Also Read - मैं पार्टी में जाति, धर्म आधारित प्रकोष्ठ के पक्ष में नहीं हूं: नितिन गडकरी

(इनपुट-भाषा)