नई दिल्ली. मिजोरम में इस महीने के आखिरी हफ्ते में विधानसभा के चुनाव होने हैं. देश के पूर्वोत्तर इलाके में बर्मा (म्यामार) और बांग्लादेश से सटा यह राज्य इस इलाके में अब अकेला ही बचा है, जिसने देश की सबसे पुरानी पार्टी, कांग्रेस को सहारा दे रखा है. जाहिर है कांग्रेस जी-जान से सत्ता बचाने में लगी है. वहीं, पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके में तेजी से उभरी भारतीय जनता पार्टी भी इस बार पूरे दम-खम के साथ, सहयोगियों के सहारे ही सही, कांग्रेस को चुनौती देने की तैयारी में लगी है. मिजोरम, तीन शब्दों का समूह है, जिससे मिलकर यह राज्य बना है. ‘मि’ का मतलब ‘लोग’, ‘जो’ का आशय पहाड़ी इलाके से है और ‘रम’ का अर्थ होता है ‘भूमि’ यानी जमीन या जगह. यानी पहाड़ी लोगों के रहने की जगह को मिजोरम कहा गया है. स्थापना की गिनती में देखें तो यह भारत का 23वां राज्य है, जो गर्मी के दिनों में न तो बहुत गर्म रहता है और न ही सर्दी के दिनों में यहां मैदानी इलाकों की तरह भीषण ठंड पड़ती है. यह अलग बात है कि इन दिनों मिजोरम का माहौल, राजनीतिक रूप से जरूर गर्म है, क्योंकि आगामी 28 नवंबर को यहां विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है.

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असम का हिस्सा से UT और राज्य बनने तक का सफर
नदियों, पहाड़ों और घाटियों का धनी यह राज्य वर्ष 1972 तक असम का ही हिस्सा था. उससे अलग होने के बाद केंद्रशासित प्रदेश बना. आखिरकार यहां के निवासियों के करीब 30 साल तक सरकार के साथ चले संघर्ष के बाद 20 फरवरी 1987 को स्वतंत्र मिजोरम राज्य का अस्तित्व हमारे सामने आया. यह जानना रोचक होगा कि अलग राज्य के लिए लंबे अर्से तक चले जिस आंदोलन के बाद 600 से ज्यादा हथियारबंद लड़ाकों ने समर्पण कर मिजोरम को राज्य का दर्जा दिलाया, वह सपना आज किस हद तक पूरा हो पाया है. क्योंकि देश में शिक्षा के स्तर पर केरल के बाद सर्वाधिक शिक्षित राज्य होने और कई चुनाव देख लेने के बावजूद आज भी मिजोरम में रहने वाले लोगों की बुनियादी समस्याओं को दूर करने के आश्वासन दिए ही जा रहे हैं. इस विधानसभा चुनाव में भी एक तरफ जहां पीएम नरेंद्र मोदी यहां के लोगों को भाजपा को सत्ता में लाने के लिए विकास की बातें कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी केंद्र और भाजपा सरकार की नाकामियां गिनाकर अपनी पार्टी की सत्ता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

Mizoram-Hill

क्या आज की पीढ़ी को याद होंगे राजीव गांधी?
मिजोरम राज्य के बनने के इतिहास से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम जुड़ा हुआ है. हालांकि यह कहना कठिन है कि क्या मिजोरम में पिछले 30 वर्षों के भीतर या नई सदी में पैदा होने वाले वोटर, अपने राज्य के इतिहास के साथ राजीव गांधी का नाम जोड़कर पढ़ते होंगे? शायद नहीं! दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और मिजोरम के गठन के बीच अनोखा रिश्ता है, जिसे इस चुनाव के मौके पर कांग्रेस को याद करना चाहिए. क्योंकि वे राजीव गांधी ही थे, जो मिजोरम के स्वतंत्र राज्य बनने के समय देश के प्रधानमंत्री थे. 1960 में स्थापना के बाद से मिजोरम राज्य के लिए संघर्षरत मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) और सरकार के बीच तकरीबन 30 वर्षों तक जंग चली थी. इन तीन दशकों में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन यह संघर्ष जारी रहा.

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वर्ष 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अचानक हुई मौत के बाद राजीव गांधी पीएम बने. फिर 1985 के शुरुआती महीनों में MNF के लीडर लालडेंगा की राजीव गांधी से मुलाकात हुई. ग्रेटर मिजोरम राज्य के लिए संघर्ष कर रहे इस संगठन के साथ पहली बार निर्णयात्मक बातचीत की शुरुआत हुई. आखिरकार जून 1986 में MNF और केंद्र सरकार के बीच समझौता हुआ और 20 फरवरी को देश में स्वतंत्र रूप से मिजोरम राज्य का उदय हुआ. राज्य बनने के बाद सैकड़ों की तादाद में MNF के हथियारबंद समर्थकों ने सरेंडर किया. मिजोरम सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर यह आंकड़ा देखें तो कुल 614 MNF कार्यकर्ताओं ने सरेंडर किया था और हथियारों का बड़ा जखीरा (LMG, राइफल जैसे बड़े हथियार) बरामद किया गया. इस तरह से मिजोरम में शांति बहाल हुई. खुद पीएम राजीव गांधी मिजोरम की राजधानी आईजॉल आए और इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने थे.