नई दिल्ली/आइजोल. मिजोरम विधानसभा चुनाव (Mizoram elections Result 2018) में मंगलवार को वोटों की गिनती जारी है. चुनावी रुझानों में दिखता है कि दो बार से सत्ता में काबिज कांग्रेस इस बार बड़ी हार का सामना करने जा रही है. वहीं, दो बार से लगातार और कुल पांच बार सीएम रह चुके लाल ललथनहवला चम्फाई दक्षिण सीट से चुनाव हार गए हैं. उन्हें MNF के प्रत्याशी टीजे ललनुंतलौंगा ने हराया है. अब तक के रुझानों में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) को 27 सीटें मिलती दिख रही हैं. वहीं कांग्रेस 6, बीजेपी 1 और अन्य 4 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. Also Read - यूपी के मंत्री ने कहा- कांग्रेस ने भ्रम फैलाकर पाया वोट, पछता रहे हैं मध्यप्रदेश के लोग

इस चुनाव को असम चुनाव की तरह देखा जा रहा था. कांग्रेस को दो बड़े दिग्गज नेताओं ने पार्टी से नाता तोड़ कर एक ने बीजेपी तो दूसरे ने एमएनएफ ज्वाइन कर लिया था. इसके बाद से कांग्रेस आरोप लगा रही थी कि एमएनएफ और बीजेपी साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं. कांग्रेस ने राज्य के 87 फीसदी ईसाई वोटरों को रिझाने के लिए यहां तक आरोप लगाया था कि बीजेपी एमएनएफ के सहार प्रदेश की संस्कृति को बदलना चाहती है. बता दें कि साल 2013 के चुनाव में ललथनहवला की अगुवाई में कांग्रेस को 34 सीटें मिली थीं. Also Read - एमएनएफ के प्रमुख जोरमथंगा ने ली मिजोरम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ

ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ा था
मिजोरम नॉर्थ ईस्ट में कांग्रेस का आखिरी किला था. यहां लगातार दो बार से कांग्रेस चुनाव जीत रही थी. दोनों बार उसे बड़ी जीत मिल रही थी. साल 2013 के चुनाव में कांग्रेस राज्य की 34 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी. हालांकि, इस दौरान एमएनएफ ने कांग्रेस के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाए. एमएनएफ का कहना था कि कांग्रेस राज्य के हित में काम न करते हुए लोगों के विकास में पूरी तरह से असफल रही है. ललथनहवा ने 5 बार सीएम बनकर पश्चिम बंगाल के सीएम ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ा था. वह साल 1984 में पहली बार सीएम बने थे. Also Read - सवाल- केंद्र की राजनीति में जाने वाले हैं? 15 साल मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह का जवाब- 'यहीं हूं मैं'

बीजेपी को जीत का इंतजार
दूसरी तरफ बीजेपी राज्य में खाता खोलने के लिए संघर्ष कर रही है. उसे अभी तक यहां जीत का स्वाद नहीं मिला है. हालांकि, रुझानों में वह एक सीट पर बढ़त बनाए हुई है. उसने इस चुनाव में भी दूसरे दलों के कई नेताओं को पार्टी में ज्वाइन कराया था. इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि एमएनएफ और बीजेपी मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं.