नई दिल्ली| तमिलनाडु में हिंदी विरोध का स्वर एक बार फिर उठने लगा है. इसी क्रम में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के बेटे और डीएमके नेता एमके स्टालिन ने बीजेपी सरकार पर गैर हिंदी भाषी लोगों के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया है. स्टालिन ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार भारत की एकता को नष्ट करना चाहती है. इतना ही नहीं उन्होंने वीडियों में यह भी कहा है कि यह सरकार गैर हिंदी भाषी लोगों को एक किनारे करने की कोशिश कर रही है.

द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष स्टालिन ने हाल ही में 20 अप्रैल को हिन्दी भाषा को अनिवार्य बनाने के लिए राष्ट्रपति द्वारा दिए गए आदेश का विरोध किया था. इस आदेश के अनुसार मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा सीबीएसई और केन्द्रीय विद्यालय संगठन के सभी स्कूलों में दसवीं कक्षा तक हिंदी एक अनिवार्य विषय बनाया जाना तय हुआ है. इस मामले पर स्टालिन ने हिंदी विरोधी आंदोलन की परिस्थति को दुबारा पैदा न किए जाने की चेतावनी दी थी.

इससे पहले बीते माह कई क्षेत्रीय दलों और एमके स्टालिन ने राज्य से गुजरने वाले राजमार्गों पर लगने वाले साइन बोर्ड्स पर हिंदी में लिखे जाने का विरोध किया था. इसके पीछे उन्होंने राज्य में विदेशी सैलानी न आने का तर्क दिया था. मालूम हो तमिलनाडु में तमिल और हिंदी के बीच की लड़ाई दशकों पुरानी है. 1937 में इस भाषाई विरोध ने दंगों का रुप ले लिया था. उस समय इस विवाद में 2 लोंगो की मौत भी हो गई थी.