चंडीगढ़: पंजाब से आम आदमी पार्टी के बागी विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने पार्टी पर अपनी मूल विचाराधारा और सिद्धांतों से पूरी तरह भटकने का आरोप लगाते हुए रविवार को उसकी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना त्यागपत्र आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेज दिया है. केजरीवाल पर करारा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, ”मुझे यह कहते हुए दुख है कि आपके तानाशाही रवैये ने भारतीयों और पंजाबियों के स्वच्छ विकल्प के सपने को चकनाचूर कर दिया और उन्हें सड़ी गली व्यवस्था में पहुंचा दिया. ” वहीं, आप नेता और दिल्ली सरकार में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा, अगर वह राष्ट्र के लिए काम करना चाहता है, तो उसे हमारे साथ रहना चाहिए, अगर वह अपने हितों और पद के लिए काम करना चाहता है तो वह कहीं भी जा सकता है, यह हमें कैसे चिंतित करता है?

पिछले पंजाब विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले दिसंबर, 2015 में वह आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे. उससे पहले वह कांग्रेस में थे. खैरा ने कहा, दुर्भाग्य से पार्टी में शामिल होने के बाद मैंने अहसास किया कि आप का पदक्रम भी पारंपरिक केंद्रीकृत राजनीतिक पार्टियों से अलग नहीं है. 2017 के पंजाब चुनाव से पहले के घटनाक्रम ने मेरे विश्वास को और मजबूत कर दिया कि पार्टी में अंदरूनी लोकतंत्र नहीं है.

पिछले साल दिसंबर में खैरा ने आप के निलंबित विधायक धर्मवीर गांधी और लोक इंसाफ पार्टी के साथ मिलकर पंजाब डेमोक्रेटिक एलायंस बनाया था. पद से हटाए जाने के बाद खैरा ने 7 समर्थकों के साथ बागियों के एक समूह का गठन किया, जिसने पार्टी की पंजाब इकाई के लिए स्वायत्तता की मांग की.

बोलाथ से विधायक खैरा (53) ने अपने त्यागपत्र में कहा, ”मैं आप की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देने के लिए बाध्य हूं क्योंकि अन्ना आंदोलन के बाद पार्टी जिस विचाराधारा और सिद्धांतों पर बनी थी, उससे वह पूरी तरह भटक गई है.” उनके त्यागपत्र की प्रतियां मीडिया को जारी की गयी है.

खैरा ने कहा, ”यद्यपि आप मुझे और कंवर संधू को पार्टी से अपमानजनक तरीके से निलंबित कर हमारे अच्छे कार्य का इनाम पहले ही दे चुके हैं, तथापि मैं आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़कर आप से और पार्टी से संबंध विच्छेद को औपचारिक रूप देना चाहता हूं.”

पिछले साल जुलाई में पंजाब विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाए जाने के बाद से वह आप नेतृत्व के मुखर आलोचक रहे हैं. पिछले साल नवंबर में खैरा को संधू के साथ ही पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर निलंबित कर दिया गया था.

केजरीवाल पर करारा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, ”मुझे यह कहते हुए दुख है कि आपके तानाशाही रवैये ने भारतीयों और पंजाबियों के स्वच्छ विकल्प के सपने को चकनाचूर कर दिया और उन्हें सड़ी गली व्यवस्था में पहुंचा दिया. ”

खैरा ने कहा, फलस्वरुप, प्रशांत भूषण से लेकर एच एस फूलका तक पार्टी के करीब करीब सभी बड़े नेताओं ने या तो पार्टी छोड़ दी या फिर आपने उन्हें पार्टी से निकाल दिया. खैरा ने कहा, देश की पांरपरिक पार्टियों की वर्तमान राजनीतिक संस्कृति बुरी तरह बिगड़ चुकी है, जिसके चलते आप के गठन से बहुत उम्मीदें जगीं थीं.