नई दिल्ली: सरकार ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि देश में प्याज की अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिये सरकारी व्यापार उपक्रम एमएमटीसी प्याज का आयात कर रही है और इसकी पहली खेप अगले साल 20 जनवरी तक पहुंचने की उम्मीद है. खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री दानवे रावसाहेब दादाराव ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में बताया कि भारत में इस साल बारिश की देर से शुरुआत होने और देर तक बारिश जारी रहने के कारण प्याज की फसल पर व्यापक नकारात्मक असर हुआ. इसकी वजह से देश में इस समय प्याज की कमी के कारण इसकी ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ रहा है.

उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिये सरकार ने बफर स्टॉक का भी इस्तेमाल किया है. दादाराव ने प्याज की कीमतों में इजाफे की बात को स्वीकार करते हुये कहा, ‘‘बफर स्टॉक के जरिये प्याज की आपूर्ति किये जाने के बाद एमएमटीसी ने तमाम देशों से प्याज का आयात किया है. इसके 20 जनवरी तक भारत आ जाने की उम्मीद है.’’ उल्लेखनीय है कि दिल्ली में बृहस्पतिवार को प्याज की कीमत 109 रुपये प्रति किग्रा तक पहुंच गयी.

खाद्य तेल की कमी से जुड़े एक अन्य पूरक प्रश्न के जवाब में दादाराव ने कहा कि इस साल सोयाबीन का उत्पादन पर्याप्त नहीं होने के कारण देश में खाद्य तेलों की मांग और आपूर्ति का अंतर बढ़ गया. उन्होंने कहा कि 2019-20 में सोयाबीन का महाराष्ट्र में उत्पादन 42.08 लाख टन होने का अनुमान है. जबकि 2018-19 में इसकी मात्रा 45.48 लाख टन थी.

मंत्री ने कहा कि मांग की तुलना में आपूर्ति नहीं हो पाने की स्थिति में उत्पादन में बढ़ोतरी और आयात करना ही विकल्प है. उन्होंने बताया कि देश में खाद्य तेलों की कुल मांग की 60 प्रतिशत आयात से और शेष 40 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से पूर्ति होती है. सरकार ने खाद्य तेलों की मांग को घरेलू उत्पादन से ही पूरा करने के लिये तिलहन के उत्पादन में बढ़ोतरी के लिये तमाम सार्थक कदम उठाये हैं.

(इनपुट भाषा)