मनरेगा बनी 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी', बढ़े साल में रोजगार के दिन, जानिए क्या-क्या बदला

यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा, जिसके बाद बदलाव लागू होंगे. ग्रामीण मजदूरों के लिए यह राहत भरा कदम है.

Published date india.com Published: December 13, 2025 10:46 AM IST
मनरेगा
मनरेगा

केंद्र सरकार ने 12 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना करने की मंजूरी दे दी गई. योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले गारंटीड रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है. यह नाम महात्मा गांधी की ग्रामीण स्वावलंबन और ग्राम स्वराज की विचारधारा को बेहतर तरीके से दर्शाता है. “पूज्य बापू” शब्द गांधीजी के प्रति सम्मान व्यक्त करता है. इसमें मजदूरों के लिए बेहतरी के लिए फैसले लिए गए हैं.

सबसे बड़ा बदलाव रोजगार के दिनों में वृद्धि

पहले जहां हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य को साल में 100 दिनों का गारंटीड काम मिलता था, अब यह 125 दिन हो गया है. इससे ग्रामीण मजदूरों को अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार मिलेगा, जिससे उनकी आय में स्थिरता आएगी. कुछ रिपोर्ट्स में न्यूनतम दैनिक मजदूरी को भी 240 रुपये प्रति दिन करने का उल्लेख है, हालांकि यह राज्यवार भिन्न हो सकती है. मजदूरी बढ़ी है मजदूरों की रोजमर्रा की जिंदगी में बेहतर तरीके से स्थिरता आएगी.

योजना के लिए बजट आवंटन  बढ़ा

योजना के लिए बजट आवंटन भी बढ़ाया गया है, जिसमें केंद्र का हिस्सा लगभग 95,600 करोड़ रुपये और कुल 1.51 लाख करोड़ रुपये तक का प्रावधान प्रस्तावित है.

मजदूरों को मिलेगा ये काम

योजना के कार्यों में मुख्य रूप से

  • जल संरक्षण,
  • तालाब खुदाई,
  • सड़क निर्माण,
  • बागवानी और
  • सामुदायिक विकास से जुड़े श्रम आधारित प्रोजेक्ट शामिल हैं.

इन बदलावों से ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी कम होने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ने और स्थानीय मजबूत होने की उम्मीद है.

दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना

मनरेगा दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजनाओं में से एक है, जो करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का आधार बनी हुई है. 2022-23 तक इसमें करीब 15.4 करोड़ लोग सक्रिय थे. इस फैसले पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं.

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कब शुरू हुई मनरेगा

मनरेगा योजना की शुरुआत मूल रूप से 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के रूप में हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों को सालाना कम से कम 100 दिनों का अकुशल श्रम आधारित रोजगार प्रदान करना था. 2009 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने इसे महात्मा गांधी के नाम से जोड़कर मनरेगा कर दिया. अब मोदी सरकार ने इसे फिर से नए नाम से जोड़ते हुए पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना नाम दिया है. स्कीम में जो बदलाव हुए है वे मजदूरों के हक में बेहतर साबित होंगे.

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