गुरमेहर विवाद में वीरेंद्र सहवाग के बाद गौतम गंभीर भी कूद पड़े हैं। गौतम गंभीर ने एक वीडियो जारी कर कहा कि अपनी कहने का सभी को पूरा हक है। गुरमेहर के समर्थन में गौतम गंभीर ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा कि हम सभी को अपनी बात रखने का हक है।Also Read - गौतम गंभीर फिर मिली धमकी, 6 दिन में तीसरी बार आया जान से मारने का मेल

एक मिनट चार सेकंड के इस वीडियो के माध्यम से गौतम गंभीर ने कहा है कि मेरे दिल में भारतीय सेना के लिये अत्यंत सम्मान है और मैं भारतीय सेना का बहुत सम्मान करता हूं। भारतीय सैनिकों के राष्ट्र के प्रति बेजोड़ साहसिक काम को हम सभी सलाम करते हैं। Also Read - BJP सांसद गौतम गंभीर को 'ISIS Kashmir' नाम से फिर मिली जान से मारने की धमकी 

लेकिन बीते कुछ दिनों में देश में घट रही घटनाओं ने मुझे काफी निराश और मायूस किया है। हम एक ऐसे स्वतंत्र देश के नागरिक हैं जहां सभी को अपनी बात कहने का पूरा हक है। Also Read - Gautam Gambhir को ISIS Kashmir नाम से मिली जान से मारने की धमकी, पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

इसके बाद गौतम गंभीर ने कहा है कि अगर कोई ऐसी बच्ची जिसने अपने पिता को युद्ध में खो दिया हो तो उसे अपनी बात रखने का पूरा हक है। लेकिन कुछ लोग गुरमेहर जैसे लोगों को टारगेट कर कुछ तथाकथित लोगों के झुंड को अपनी राष्ट्रभक्ति दिखाने के लिये अवसर मिल जाता है। यह भी पढ़ें: गुरमेहर पर मजाक कर घिरे सहवाग ने तोड़ी चुप्पी, दी ये सफाई

इतना ही नहीं इसके बाद गौतम गंभीर ने कहा गुलमेहर जैसे लोग अपनी बात कहने के लिये उतने ही हकदार हैं जितने कि अन्य नागरिक। उनकी बातों से हर कोई सहमत हो यह भी संभव नहीं है लेकिन ऐसे लोगों का मज़ाक उड़ाने कि घिनौनी हरकत न करें।

इस वीडियो के जारी होने के बाद वीरेंद्र सहवाग ने सफाई देते हुए कहा है कि “किसी को भी बिना डर के अपने विचार रखने का हक है। चाहे वह गुरमेहर हो या फोगाट बहनें।’

गौरतलब है कि बीते साल मई माह में गुरमेहर कौर ने एक वीडियो पोस्ट किया था जिसके बाद देश भर में इसको लेकर बहस छिड़ गई है। इस वीडियो के एक पार्ट में गुरमेहर एक तख्ती लिए हुए हैं जिसमें लिखा है – मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं, युद्ध ने मारा।

इस वीडियो के इसी हिस्से को मुद्दा बना दिया गया। इस विवाद की शुरूआत दिल्ली के रामजस कॉलेज में जेएनयू छात्र उमर खालिद के भाषण को लेकर हुई जिसके बाद एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विरोध करते हुए खालिद का भाषण ही नहीं होने दिया। इसके बाद आइसा और एबीवीपी के छात्रों में जमकर झड़प हुई जिसमें कुछ छात्रों को चोटें भी आईं।