नई दिल्ली: वर्ष 2019 के आम चुनावों से पहले, सरकार ने बुधवार को 15,053 करोड़ रुपये की खरीद नीति की घोषणा की जिसमें राज्यों को वैकल्पिक योजनाओं के बीच चुनाव करने तथा किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अनाजों की खरीद के लिए निजी एजेंसियों को जोड़ने की छूट होगी. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में नई समग्र नीति ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (पीएम-आशा) को मंजूरी दी गई. Also Read - कृषि विधेयकों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेगी कांग्रेस, दो करोड़ किसानों के जुटाएगी हस्ताक्षर

कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, “पीएम-आशा का लक्ष्य वर्ष 2018 के लिए केंद्रीय बजट की घोषणा के अनुरूप किसानों को उनकी ऊपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है. यह एक ऐतिहासिक निर्णय है.” पीएम-आशा के तहत, खाद्य जिंसों की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम होने की स्थिति में राज्यों को खरीद करने के लिए तीन योजनाओं – मौजूदा मूल्य सहायता योजना (पीएसएस), नयी तैयार की गयी मूल्य कमी भुगतान योजना (पीडीपीएस) और पायलेट के तौर पर शुरू की गयी प्रइवेट खरीद स्टॉकिस्ट योजना (पीपीएसएस) में से किसी एक के चयन करने की अनुमति होगी. Also Read - कृषि विधेयकों के समर्थन में अनुपम खेर ने कहा- अब किसान आत्मनिर्भर बनेंगे

मंत्रिमंडल ने अगले दो वित्तीय वर्षों में पीएम-आशा को लागू करने के लिए 15,053 करोड़ रूपए की मंजूरी दे दी है, जिसमें से इस वर्ष 6,250 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसके अलावा, 16,550 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सरकारी गारंटी प्रदान करके खरीद एजेंसियों के लिए रिण सुविधा (क्रेडिट लाइन) बढ़ाकर 45,550 करोड़ रुपये कर दी गई है. सरकार ने उल्लेख किया कि पीडीपीएस योजना, मध्य प्रदेश सरकार की भावांतर भुगतान योजना (बीबीवाई) की तर्ज पर है, लेकिन यह केवल तिलहन किसानों की संरक्षा करेगा. Also Read - कृषक विधेयक: आखिर क्या चाहते हैं किसान? यहां जानिए MSP को लेकर किसानों की शंकाएं और मांगें

पीडीपीएस के तहत, सरकार थोक बाजार में उद्धृत तिलहनों के एमएसपी और मासिक औसत मूल्य के बीच के अंतर का भुगतान उत्पादकों को करेगी. यह किसी राज्य में तिलहन उत्पादन के 25 प्रतिशत तक भाग के लिए लागू किया जाएगा.

एक पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से अधिसूचित बाजार यार्ड में उपज बेचने वाले पूर्व-पंजीकृत किसानों को मूल्य अंतर का भुगतान किया जाएगा. बयान में कहा गया है, “इस योजना में फसलों की कोई भौतिक खरीद शामिल नहीं है और केंद्र सरकार मानदंडों के अनुसार पीडीपीएस के लिए समर्थन देगी.” इसके अलावा, राज्यों को आठ जिलों में प्रायोगिक आधार पर तिलहन खरीद के लिए निजी कंपनियों को साथ लाने का विकल्प दिया गया है.

नई नीति के तहत, राज्यों के पास मौजूदा मूल्य सहायता योजना (पीएसएस) चुनने का विकल्प भी होगा, जिसके अंतर्गत केंद्रीय एजेंसियां कीमतें एमएसपी से नीचे होने की स्थिति में, एमएसपी नीति के दायरे में आने वाली वस्तुओं को खरीदती हैं.

सिंह ने कहा कि राज्यों ने किसानों को एमएसपी सुनिश्चित करने के लिए पीएसएस या पीडीपीएस या पीपीएसएस का चयन कर सकते हैं. सिंह ने कहा कि यह किसानों की आय की संरक्षा के लिए सरकार द्वारा लिया गया एक अभूतपूर्व कदम है, जो कि किसानों के कल्याण की दिशा में दूर का कदम साबित होने की उम्मीद है.

किसानों को एमएसपी प्रदान करने के लिए धान, गेहूं और पोषक अनाज / मोटे अनाज की खरीद के साथ ही कपास और जूट जैसी वाणिज्यिक फसलों के लिए अन्य मौजूदा खरीद योजनाओं को जारी रखा जा रहा है. सिंह ने आगे कहा कि सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा कि बाजार संरचना सहित, उत्पादकता में वृद्धि, खेती की लागत को कम करने और कटाई बाद के फसल प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है. सरकार द्वारा कई बाजार सुधार उपाय शुरू किए गए हैं. एमएसपी नीति के तहत, सरकार खरीफ और रबी मौसमों में उगाई गई 23 अधिसूचित फसलों की दरों को निर्धारित करती है.

(इनपुट: एजेंसी)