नई दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को शत्रु शेयरों की बिक्री के लिए तय प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को मंजूरी दे दी. इसकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 3,000 करोड़ रुपये है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी. शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के अनुसार शत्रु संपत्ति से आशय वैसी संपत्ति है जिसका मालिकाना हक या प्रबंधन किसी शत्रु या शत्रु कंपनी के पास है. इस फैसले से दशकों तक बेकार पड़ी शत्रु अचल सम्‍पत्ति को बाजार में भुनाया जा सकेगा. इनकी बिक्री से मिले धन का इस्‍तेमाल विकास और समाज कल्‍याण कार्यक्रमों में किया जा सकता है.

बयान के अनुसार, ‘इस प्रकार की संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि उसी रूप से रखी जाएगी जैसा कि विनिवेश राशि के मामले में होता है इसकी देखरेख वित्त मंत्रालय करता है. निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) को शेयरों की बिक्री के लिये अधिकृत किया गया है. इसमें कहा गया है कि 20,323 शेयरधारकों के 996 कंपनियों के कुल 6,50,75,877 शेयर सीईपीआई (कस्टोडियन आफ एनिमी प्रोपर्टी आफ इंडिया) के कब्जे में है. इन 996 कंपनियों में से 588 सक्रिय, 139 कंपनियां सूचीबद्ध है और शेष कंपनियां गैर-सूचीबद्ध है.

इन शेयरों को बेचने की प्रक्रिया के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा गृहमंत्री को शामिल करके वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली वैकल्पिक कार्यप्रणाली (एएम) से मंजूरी प्राप्त करनी होती है. इस कार्यप्रणाली की सहायता अधिकारियों की उच्चस्तरीय समिति करेगी जिसके सह-अध्यक्ष दीपम विभाग के सचिव और गृह मंत्रालय के सचिव (आर्थिक मामलों के विभाग, डीएलए, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और सीईपीआई के प्रतिनिधियों सहित) होंगे.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ‘दशकों से निष्क्रिय पड़ी शत्रु चल संपत्ति को अब बेचा जा सकेगा. सेल से हुई आय का इस्तेमाल कल्याण कार्यक्रमों में होगा.’ सरकार के इस कदम से केंद्र के विनिवेश प्रोग्राम को बढ़ावा मिलेगा, जो इस साल अब तक सुस्त रहा है जबकि इसका लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपये है. इस वित्त वर्ष में 7 महीने पहले ही पूरे हो चुके हैं और सरकार अबतक 10,000 करोड़ रुपये ही जुटा सकी है. अब सरकार टारगेट को पूरा करने के लिए बायबैक पर ध्यान दे रही है, जो कुल वित्तीय घाटे के टारगेट को बरकरार रखने के लिए महत्वपूर्ण है.

(इनपुट-भाषा)