श्रीनगरः केंद्र सरकार ने कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय खासकर कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के आरोप में मुहम्मद यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) पर शुक्रवार को प्रतिबंध लगा दिया. ये प्रतिबंध गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत लगाया गया है. इस संगठन पर आतंकवाद और अलगाववाद को प्रोत्साहन देने का भी आरोप है. इसमें कहा गया है कि 1989 में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ नरसंहार कराने के पीछे यासीन मलिक का हाथ था. मलिक के संगठन पर भारतीय वायु सेना के चार जवानों की हत्या और तत्कालीन गृह मंत्री रहे मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण करने का भी आरोप है. रूबिया सईद, राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बहन है.

गृह सचिव राजीव गॉबा ने कहा कि आतंकवाद के गंभीर आरोप के मद्देनजर सरकार ने जेकेएलएफ (यासीन मलिक गुट) पर प्रतिबंध लगा दिया. उसे गैरकानूनी गतिविधियां निवारक अधिनियम के तहत गैरकानूनी घोषित किया गया है. इस संगठन के बारे में कहा जाता है कि वह जम्मू एवं कश्मीर को भारत से अलग करने का समर्थन करता है.

मलिक वर्तमान में जम्मू के कोट बलवाल जेल में हिरासत में हैं. गॉबा ने मीडिया से कहा, “जेकेएलएफ ने कश्मीर में अलगाव की विचाराधारा को बढ़ावा दिया और संगठन 1988 से अलगाववादी गतिविधियों व हिंसा को प्रोत्साहन दे रहा है.” गृह मंत्रालय की एक अधिसूचना में कहा गया है, “कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों को निकालने का यासीन मलिक मास्टरमाइंड रहा है और उनके संहार के लिए जिम्मेदार है.”

जेकेएलएफ को भारतीय वायुसेना के चार अफसरों की हत्या का इलजाम लगता रहा है. साथ ही उस पर तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का भी आरोप लगा था. इससे पहले केंद्र ने जम्मू एवं कश्मीर की जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाया था.