नई दिल्ली: देश में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल के तहत अगले पांच वर्षों में सभी स्कूलों को ‘डिजिटल बोर्ड’ से लैस किया जायेगा. मानव संसाधन विकास मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता सचिव अनिल स्वरूप ने बताया, ‘प्रथम चरण में सभी माध्यमिक स्कूलों को डिजिटल बोर्ड से लैस किया जायेगा. यह कार्य पांच वर्षो में पूरा कर लिया जायेगा.’

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में उद्योगों से मिलने वाले सीएसआर (कार्पोरेट सामाजिक दायित्व) कोष और निजी क्षेत्र से जुटाये गए धन से करीब 60 हजार स्कूलों में डिजिटल बोर्ड लग गए हैं. गुजरात और राजस्थान ने इस मॉडल को अपनाने का निश्चय किया है. अनिल स्वरूप के अनुसार, केरल ने बताया है कि उसका इरादा इसी वर्ष में स्कूलों को डिजिटल बोर्ड से लैस करने का है. उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकार स्कूलों को डिजिटल बोर्ड से लैस करने में सहयोग करेगी.

स्कूल में बिजली नहीं लेकिन पूरा स्कूल डिजिटल..
अनिल स्वरूप ने बताया कि वे सवा साल पहले महाराष्ट्र के ठाणे में परतेपाडा गांव गए थे. स्कूल में बिजली नहीं थी लेकिन पूरा स्कूल डिजिटल था. वहां बैटरी चार्ज करने के लिए सोलर पैनल लगे थे और इसकी मदद से टैबलेट का उपयोग किया जा रहा था. इन टैबलेट से डिजिटल स्क्रीन को जोड़ा गया था. इसके लिये स्कूल ने लोगों से पैसे जुटाये थे. ब्लैकबोर्ड से आगे बढ़ते हुए स्कूलों को डिजिटल बोर्ड से लैस करने से ग्रामीण और दूर-दराज के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी देश-दुनिया से जुड़ी जानकारी और विषय वस्तु से परिचित हो सकेंगे जो उनके विकास में मददगार साबित होगा .

यह अभियान करीब 60 साल पहले चलाये गये ब्लैक बोर्ड अभियान की तरह ही देश भर में चलाया जा रहा है. यह योजना जरा मंहगी है, लेकिन केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ नगरीय निकाय, कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) और जनभागीदारी के जरिए इसके लिए कोष जुटाने पर जोर दिया जा रहा है.

(इनपुट-भाषा)