नई दिल्लीः सरकार ने संयुक्त सचिव स्तर के पदों पर ‘सिंगल काडर’ नियुक्ति प्रक्रिया के तहत होने वाली भर्ती में आरक्षण के नियमों को लागू कर पाने में व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए कहा है कि इन पदों पर क्षेत्र विशेष के पेशेवर लोगों की नियुक्ति में आरक्षण प्रणाली लागू कर पाना संभव नहीं है.

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने राज्यसभा में प्रश्नकल के दौरान एक सवाल के जवाब में बताया कि सरकारी विभागों में पेशेवरों की जरूरत को पूरा करने के लिये होने वाली भर्ती प्रक्रिया में संघ लोकसेवा आयोग योग्यता के पैमाने पर भर्ती करता है. इस काडर की भर्ती में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के आवेदकों को आरक्षण नहीं मिलने के कारण इन समुदायों के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए डा. सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक सेवा के पदों पर ‘लेटरल’ भर्ती के प्रस्ताव को 2008 में पूर्व सरकार ने स्वीकार कर 2011 में मंजूरी दी थी.

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने मंजूर प्रस्ताव को यथावत रूप में लागू किया है. इसके तहत किसी विभाग में पेशेवरों की जरूरत के मुताबिक एक या दो पदों पर भर्ती की मांग आयोग के समक्ष पेश की जाती है. इसीलिये इसे ‘सिंगल काडर’ पद कहा जाता है. ऐसे में आरक्षण दे पाना व्यवहारिक नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंगल काडर पद के लिए सृजित पद, सिविल सेवा के पदों से बिल्कुल भिन्न होते है. इसलिए सिविल सेवा के आरक्षित पदों पर सिंगल काडर पद से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.