नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने आरक्षण के मसले पर बड़ा दांव खेला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने केंद्र सरकार की नौकरियों में सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है. केंद्र सरकार का यह एक ऐतिहासिक फैसला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया. गौरतलब है कि कई राज्यों में सवर्ण आरक्षण की मांग करते आ रहे हैं. हाल में तीन हिंदीभाषी राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा के सत्ता से बाहर होने के बाद इस फैसले की अहमियत और बढ़ जाती है.

बीजेपी नेता शहनवाज हुसैन ने इसे मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि गरीब स्वर्ण समुदाय लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था. पीएम मोदी ने उनकी इस मांग को मानकर समाज को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. गौरतलब है कि केंद्र और राज्यों में पहले ही अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी और अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए 22.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है.

इससे पहले संविधान के तहत अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्गों के आरक्षण जारी रखने की प्रतिबद्धता जताते हुए सरकार ने हाल ही में कहा था कि ओबीसी को उपवर्गों में बांटने के बारे में बनायी गई समिति को उसकी सिफारिशें देने के लिए 31 मई 2019 तक का समय बढ़ा दिया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह ने राज्यसभा में आरक्षण संबंधी भाजपा के डा. विकास महात्मे के निजी संकल्प पर हुई चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए यह बात कही.

उन्होंने कहा था कि आरक्षण जारी रखने के बारे में सरकार की प्रतिबद्धता को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिये. उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण के तहत उपवर्गीकरण की जांच के लिये एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गयी है. सिंह ने कहा कि इस समिति को उसकी सिफारिशें देने के लिये समय अवधि को 31 मई 2019 तक बढ़ा दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस समिति की रिपोर्ट आने से ओबीसी उपवर्गीकरण के मुद्दे पर निर्णय करने में ओबीसी आयोग को मदद मिलेगी.