PIB Fact Check: देश में जारी कोरोना संकट (Coronavirus) के बीच इंटरनेट और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों का चलन काफी बढ़ गया है. सरकार की तरफ से फर्जी पर यकीन नहीं करने की बार-बार अपील भी की जाती रही है. लोगों के कहा जाता है कि जब तक कोई आधिकारिक घोषणा न हो तब तक ऐसी भ्रामक खबरों (Fake News) पर भरोसा नहीं करें. इसके लिए सरकार की PIB की तरफ से Fact Check की भी शुरुआत की गई है. इसका उद्देश्य लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और भ्रामक खबरों के खिलाफ सचेत करना है.Also Read - नए कोरोना वैरिएंट ‘Omicron’ के डर से दुनिया भर के देशों ने लगाईं यात्रा पाबंदियां, जानिए कहां-कहां लागू हुए प्रतिबंध

उधर, सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ‘PM Funds’ के तहत प्रत्येक परिवार को 10,000 प्रदान कर रही है. आइये जानते हैं क्या है इस खबर की सच्चाई. PIB की फैक्ट चेक में यह खबर फर्जी पाई गई और बताया गया कि सरकार की तरफ से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है. Also Read - श्रेयस अय्यर, शुबमन गिल के प्रदर्शन से दक्षिण अफ्रीका दौरे से पहले भारतीय चयनकर्ताओं की चिंता बढ़ी

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PIB Fact Check ने ट्वीट किया, ‘सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ‘PM Funds’ के तहत प्रत्येक परिवार को 10,000 प्रदान कर रही है. यह दावा फर्जी है. भारत सरकार ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है और ना ही ‘PM Funds’ जैसा कोई फंड मौजूद है. PIB Fact Check सोशल मीडिया पर मौजूद खबरों की सत्यता की जांच करती है और लोगों की सचेत करती है.

एक दिन पहले एक खबर में यह दावा किया जा रहा था कि कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए 1 दिसंबर से पूरे देश में फिर से लॉकडाउन लगाया जाएगा. हालांकि, यह गलत सूचना थी. पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक के जरिए लोगों को इसपर भरोसा नहीं करने को कहा है.

पीआईबी ने ट्वीट किया, ‘एक प्रमुख मीडिया आउटलेट द्वारा कथित रूप से पोस्ट किए गए एक ट्वीट में दावा किया गया है कि देश में # COVID19 मामलों की बढ़ती संख्या के कारण सरकार 1 दिसंबर से देशव्यापी लॉकडाउन फिर से लागू करने जा रहा है #PIBFactCheck: यह ट्वीट #Morphed है. सरकार द्वारा ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है.’

प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इंटरनेट पर प्रचलित गलत सूचनाओं और फर्जी खबरों को रोकने के लिए दिसंबर 2019 में इस तथ्य-जांच विंग को लॉन्च किया. पीआईबी का उद्देश्य ‘सरकार की नीतियों और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर प्रसारित होने वाली योजनाओं से संबंधित गलत सूचना की पहचान करना है.’