नई दिल्ली: डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए अलग से कानून बनाने की पहल को गृह मंत्रालय द्वारा नकारे जाने के बावजूद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कानून बनाने के बारे में गंभीरता से विचार चल रहा है. डॉ. हर्षवर्धन ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए पृथक कानून बनाने के मुद्दे पर विचार-विमर्श चल रहा है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने मंगलवार को राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के 20वें दीक्षांत समारोह में कहा, डॉक्‍टरों पर ड्यूटी के दौरान होने वाले हमलों की सच्चाई से सरकार अवगत है. इसके मद्देनजर सरकार डाक्टरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है. इसके लिए कानून का मसौदा बनाया जा रहा है.

विभिन्न पहलुओं पर अभी विचार चल रहा है
समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और मंत्रालय की सचिव प्रीति सूदन भी मौजूद थीं. समारोह के बाद बातचीत में डॉ. हर्षवर्धन ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए पृथक कानून बनाने के मुद्दे पर विचार-विमर्श चल रहा है. गृह मंत्रालय द्वारा इस विचार को पहले ही नकार दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर अभी विचार चल रहा है.

शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी कर ली थी
बता दें कि मंत्रालय ने चिकित्साकर्मियों और चिकित्सा संस्थाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रावधानों वाले विधेयक का मसौदा तैयार कर इसे संसद के हाल ही में संपन्न हुए शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी कर ली थी.

गृह मंत्रालय ने इनकार कर दिया था
विधेयक को कानून मंत्रालय की मंजूरी मिल गई थी, लेकिन गृह मंत्रालय ने यह कहते हुए इस विधेयक को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था कि किसी खास पेशे से जुड़े लोगों की सुरक्षा के लिए अलग से कानून बनाना उचित नहीं होगा. भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में सभी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं.

कानून का मसौदे तैयार करने के ल‍िए काम चल रहा
समारोह में मौजूद मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़े कानून के मसौदे को तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है. इस विषय से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा.

2024 तक सरकारी अस्पतालों को एक लाख डॉक्‍टर मिल जाएंगे
– राज्‍यमंत्री चौबे ने बताया कि देश में डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 2024 तक सरकारी अस्पतालों को लगभग एक लाख नए डॉक्टर मिल जाएंगे.

75 नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे
– मेडिकल ग्रैजुएट (एमबीबीएस) की सीटों में इजाफे के लिए देश में 75 नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं, इनमें 58 कॉलेज तैयार हो गए हैं, शेष कॉलेज 2022 तक बन जाएंगे.

32 हजार यूजी और 19 हजार पीजी की नई सीटें होंगी
– नए मेडिकल कॉलेज खुलने से एमबीबीएस की 32 हजार और स्नातकोत्तर की 19 हजार नई सीटें उपलब्ध हो सकेंगी.

25 अस्पतालों को सुपर स्पेशिएलिटी बना रहे
– मौजूदा मेडिकल कॉलेजों को उन्नत कर सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में तब्दील किया जा रहा है. इनमें 25 अस्पतालों को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल बनाया गया है.