नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 से पहले केंद्र सरकार संस्कृत को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है. इसके तहत केंद्र सरकार तीन संस्कृत विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की तैयारी कर रही है. माना जा रहा है कि सरकार राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (दोनों दिल्ली में स्थित हैं) और राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (तिरुपति में स्थित है) को केंद्रीय विश्‍वविद्याल का दर्जा देने की तैयारी में है. इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने योजना को मंजूरी दे दी है. Also Read - भारत और बांग्लादेश क्यों मिलकर बना रहे हैं इस शख्सियत पर फिल्म? पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष... 

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इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 41 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं. जो कि संसद के एक अधिनियम द्वारा प्रदान की गई प्रतिष्ठित स्थिति, काफी प्रतिष्ठा और स्वायत्तता की एक डिग्री प्रदान करती हैं. 2014 से केंद्र सरकार ने शिक्षा प्रणाली में संस्कृत को मजबूत बनाया है. पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने भी केन्द्रीय विद्यालयों को संस्कृत के लिए जर्मन छोड़कर और आईआईटी में संस्कृत को वैकल्पिक के रूप में प्रस्तावित किया था. इसके अलावा उन्होंने संस्कृत संस्थानों को केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थिति में लाने का विचार भी जारी किया था.

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एक भी संस्कृत केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं

बता दें कि केंद्र सरकार के इस कदम को इस आधार पर उचित ठहराया जा रहा है कि हैदराबाद में दोनों भाषा-विशिष्ट केंद्रीय विश्वविद्यालय-अंग्रेजी और विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (ईएफएलयू) और मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय (MANUU) हैं. लेकिन वहां एक भी संस्कृत केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं है. दिल्ली के राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से 60 से अधिक संस्थान जुड़े हैं, इससे साफ है कि यह बड़े पैमाने पर विस्तारित हुआ है. बता दें कि केंद्र सरकार ने इस संस्थान के लिए 2015 के विश्वविद्यालय के नियमों को मंजूरी दी, ताकि संस्थान को ऑफ-कैंपस केंद्रों की अनुमति संख्या से अधिक स्थापित किया जा सके.