नई दिल्ली: सरकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कई योजनाएं शुरू करने की योजना बना रही है. बीजेपी ने अपने दिवंगत नेता की याद में कई जगहों पर स्मारक बनाने का काम शुरू कर दिया है. वहीं अटल के नाम पर कई योजनाएं शुरू कर दी गई हैं तो कुछ शुरू होने वाली हैं. खासकर उन राज्यों में जहां बीजेपी सत्ता में है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक सभी मंत्रियों को जल्द से जल्द अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर योजनाओं के एलान के लिए कहा गया है. Also Read - सोनिया गांधी ने पीएम का समर्थन किया, कहा- लॉकडाउन सही लेकिन किसानों-छोटे कारोबारियों को राहत दे सरकार

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सूत्रों ने अखबार को बताया कि वाजपेयी शासन के तहत हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में जनता को याद दिलाने के लिए भव्य समारोहों के आयोजन पर विचार किया जा रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल के नाम पर सरकारी योजनाओं के नामकरण का लक्ष्य भाजपा की ‘विकास’ आधारित राजनीति के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाना है, जिससे लोकसभा चुनाव 2019 में फायदा मिल सके. Also Read - फार्मास्युटिकल क्षेत्र को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, घरेलू विनिर्माण के लिए दिए 14 हजार करोड़ का पैकेज 

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वाजपेयी के नाम पर स्मारकों के निर्माण के लिए बीजेपी सरकार के मंत्रियों ने या तो मीटिंग शुरू कर दी है या जल्द ही अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर मीटिंग करने वाले हैं. सूत्रों ने बताया कि एचआरडी मंत्रालय अटल के नाम पर योजना को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इसी सप्ताह इसके लिए एक योजना तैयार की जाएगी. प्रकाश जावड़ेकर के नेतृत्व वाला मंत्रालय अभिनव उपलब्धियों (एआरआईआईआईए) पर संस्थानों की अटल रैंकिंग की घोषणा करने के लिए तैयार है.

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सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में अटल के योगदान पर विचार करते हुए उनके नाम पर फैलोशिप शुरू करने पर विचार कर रहा है. इतना ही नहीं एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों में उनके बारे में अधिक जानकारी भी शामिल की जाएगी. सूत्रों ने बताया कि सरकार अक्टूबर में अटल रैंकिंग के लिए आवेदन आमंत्रित करने की योजना बना रही है. दिसंबर तक रैंकिंग की घोषणा की जा सकती है.

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रैंकिंग सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थानों के लिए खुली होगी. इनका पांच मानकों पर आंकलन किया जाएगा. अटल रैंकिंग में शीर्ष 10 में शामिल संस्थानों को अपने नए शोध कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए प्रत्येक को एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इस रैंकिंग के लिए शोध की कार्यान्वयन और स्केलेबिलिटी महत्वपूर्ण होगी.