सीबीआई को लेकर केंद्र और पश्चिम बंगाल की सरकार के बीच उपजे विवाद के दौरान ममता बनर्जी का साथ देने वाले पुलिस अफसरों को मोदी सरकार ‘सबक’ सिखाने की योजना बना रही है. दरअसल, पश्चिम बंगाल में हुए पोंजी घोटाले को लेकर सीबीआई द्वारा कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने की कोशिश के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई थीं. इस धरने में राज्य के कई आला पुलिस अधिकारी भी शामिल हुए थे. राजनीतिक धरने में पुलिस अधिकारियों के शामिल होने को लेकर केंद्र सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई की योजना बना रही है.

इस क्रम में केंद्रीय गृह मंत्रालय राज्य के छह आला पुलिस अधिकारियों से उनको दिए गए सराहनीय सेवा पुरस्कारों (meritorious awards) को वापस लेने पर विचार कर रही है. इतना ही नहीं केंद्र सरकार इन अफसरों को सीनियरिटी की सूची से भी बाहर करने पर काम कर रही है.

कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से 9 फरवरी को शिलांग में पूछताछ करेगी CBI

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख (डीजीपी) विरेंद्र, एडीजी (सुरक्षा) विनीत कुमार गोयल, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अनुज शर्मा, पुलिस आयुक्त (बिधाननगर) ज्ञानवंत सिंह और कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त सुप्रतिम सरकार के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है. कुछ ऐसी ही कार्रवाई कोलकाता पुलिस के आयुक्त राजीव कुमार के खिलाफ भी की जा सकती है.

गौरलतब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई शनिवार यानी नौ फरवरी को शिलॉन्ग में करोड़ों रुपये के सारदा चिटफंड घोटाले के सिलसिले में कोलकाता पुलिस के आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ करेगी. सीबीआई ने तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य कुणाल घोष को भी पूछताछ के लिए 10 फरवरी को शिलॉन्ग बुलाया है. अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी कुमार से इसलिए पूछताछ करना चाहती है कि वह सारदा एवं अन्य पोंजी घोटाला मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी के प्रमुख थे.